अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक भारतीय अमेरिकी को अपने रिश्तेदार से हिंदी में बात करना भारी पड़ गया। यहां एक भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर अनिल वार्ष्णेय ने दावा किया है कि बीते साल उसने वीडियो कॉल के जरिए भारत में अपने एक रिश्तेदार से बात की थी, इस दौरान उन्होंने हिंदी भाषा का प्रयोग किया। जिसके कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया। वे मिसाइल डिफेंस एजेंसी (एमडीए) में काम करते थे। उन्होंने कंपनी और अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के खिलाफ कंपनी पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है।
जून में दायर किया मुकदमा
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल वार्ष्णेय ने जून में इसे लेकर अलबामा के उत्तरी जिले में मिसाइल रक्षा ठेकेदार पार्सन्स कॉर्पोरेशन और अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उन्होंने कंपनी पर प्रणालीगत भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि इस कार्यप्रणाली के कारण उन्हें पिछले साल अक्टूबर में बेरोजगार होना पड़ा।
बहनोई से हिंदी में बात करना पड़ा भारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते साल 26 सितंबर, 2022 को वार्ष्णेय को उनके बुजुर्ग बहनोई के.सी. गुप्ता ने भारत से वीडियो कॉल की थी। जब ये वाकया हुआ तब के.सी. गुप्ता मरणासन्न अवस्था में थे और उन्होंने वार्ष्णेय को अलविदा कहने के लिए फोन किया था। उनकी ये वीडियो कॉल तकरीबन दो मिनट तक चली। इस दौरान उनके एस श्वेत सहकर्मी ने उन्हें हिंदी में बात करते हुए सुना। उन्होंने अपने मुकदमें में बताया है कि दूसरे कर्मचारी ने वार्ष्णेय को बताया कि कॉल की अनुमति नहीं है, इस पर वार्ष्णेय ने तुरंत फोन काट दिया। यह कॉल गुप्ता के निधन से पहले आखिरी बार थी जब उन्होंने बात की थी।
जानबूझकर बनाया गया निशाना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकदमे में दावा किया गया है कि दूसरे कर्मचारी ने झूठी और जानबूझकर रिपोर्ट किया कि भारतीय-अमेरिकी वार्ष्णेय ने गोपनीय जानकारी का खुलासा करके सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है। वार्ष्णेय यह भी कहा है कि वार्ता के दौरान उन्होंने कोई भी गोपनीय जानकारी नहीं दी। साथ ही वी़डियो कॉल अटेंड करने से पहले वे एक खाली कक्ष में चले गए साथ ही यह भी तय किया कि वह पूरी तरह से खाली हो। उनके मुताबिक, जिस कक्ष से उन्होंने कॉल की वह पूरी तरह से खाली था, वहां किसी तरह की कोई भी वस्तु नहीं थी। उन्होंने यह सुनिश्चित कर लिया था कि एमडीए (मिसाइल डिफेंस एजेंसी) या पार्सन्स के काम से संबंधित कोई सामग्री या कुछ भी उनके आस-पास न हो।
किया गया अपमानित
इसमें उन्होंने दावा किया है कि कॉल को प्रतिबंधित करने वाली कोई नीति नहीं होने के बावजूद, और बिना किसी जांच के उन्हें गंभीर सुरक्षा उल्लंघन का आरोपी ठहराते हुए निकाल दिया गया। वार्ष्णेय ने कहा कि इतने पर भी कंपनी को संतुष्टि नहीं मिली, तो उन्होंने मुझे ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद वह भविष्य में मिसाइल डिफेंस एजेंसी (एमडीए) और अमेरिकी सरकार के साथ कभी काम नहीं कर पाएंगे। वार्ष्णेय ने आरोप लगाया है कि एमडीए सुरक्षा कर्मियों ने उनके कक्ष में मौजूद हर फाइल और उनके निजी सामान को खोला। साथ ही उनको अपमानित किया गया क्योंकि उन्होंने परिवार के एक मरते हुए सदस्य से हिंदी भाषा में बात की थी। बता दें कि एमडीए कंपनी बैलिस्टिक मिसाइल खतरों के खिलाफ अमेरिका और सहयोगी सहयोगी बलों की रक्षा करती है।
पार्सन्स ने किया आरोपों में संलिप्तता से खारिज
वहीं, दूसरी ओर पार्सन्स ने 24 जुलाई को अदालत में दायर अपने जवाब में ऐसे किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्सन्स ने पूर्वाग्रह के साथ दायर किए गए मुकदमे को खारिज करने के लिए भी कहा और वार्ष्णेय से अपने वकीलों की फीस और लागत का भुगतान करने की मांग की।
वार्ष्णेय की मांग
वार्ष्णेय ने मुकदमे में अपनी पूर्व स्थिति के बराबर पद पर बहाली और फाइल में किसी भी अनुशासनात्मक रिकॉर्ड को रद्द करने (या हटाने) की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर नौकरी के स्तर पर बहाल नहीं किया जाता है, तो अग्रिम वेतन और मानसिक रूप से परेशानी समेत उनके वकील के भुगतान की राशि प्रदान की जाए।
बीएचयू से पढ़े हैं वार्ष्णेय
वार्ष्णेय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली है। 1968 में वह अमेरिका चले गए। उन्होंने जुलाई 2011 से अक्तूबर, 2022 तक पार्सन्स के हंट्सविल कार्यालय में काम किया। उनकी पत्नी शशि 1989 से नासा में काम कर रही हैं। वार्ष्णेय को सिस्टम इंजीनियरिंग में 'कॉन्ट्रैक्टर ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया गया था। साथ ही उन्हें 'जमीन-आधारित मिसाइल रक्षा कार्यक्रम' पर 5 मिलियन अमरीकी डालर की बचत के लिए एमडीए की अनुशंसा पत्र मिला था।