मेक इन इंडिया’ के सपने को पूरा करने के लिए भारतीय वायु सेना आगे आया है। सेना का पूरा जोर अब स्वदेशी तकनीक पर है। आईआईए भवन पनकी में बृहस्पतिवार को एमएसएमई विकास संस्थान की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेंडर विकास कार्यक्रम व औद्योगिक प्रदर्शनी में इसकी झलक देखने को मिली।
एयरफोर्स के विंग कमांडर शिलादित्य सेन की अगुवाई में एयरफोर्स के जवानों ने लघु उद्यमियों को अपनी जरूरतों के बारे में बताया। ऐसे उपकरण दिखाए जो लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होते हैं। जिन उद्यमियों ने उन उपकरणों को बनाने में दिलचस्पी दिखाई, उन्हें एयरफोर्स का वेंडर बनने की जानकारी दी और रजिस्ट्रेशन कराया। प्रदर्शनी में ज्यादातर उपकरण लड़ाकू विमान मिराज-23 के उपकरण पेश किए गए। जवानों ने बताया कि ये सारे उपकरण फ्रांस से आयात होते हैं। एक एक उपकरण की कीमत पांच से 10 लाख रुपये के आसपास है। हजारों की संख्या में इनकी जरूरत पड़ती है। यदि ये उपकरण देश के लघु उद्यमी बनाएं तो लागत एक से डेढ़ लाख रुपये ही आएगी।
विंग कमांडर शिलादित्य ने बताया कि एयरफोर्स का वेंडर बनना आसान है लेकिन हर तरह का उत्पाद खरीद लिया जाएगा यह आसान नहीं। सामान वही खरीदा जाता है, जो मानक पर सौ फीसदी खरा उतरता है। आईआईए अध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि लघु उद्यमियों के लिए यह बेहतर मौका है कि वे एयरफोर्स जैसे संस्थान के वेंडर बन सकते हैं। इस तरह से कानपुर में ही हजारों की संख्या में विभिन्न तरह के उत्पाद बनाने का मौका है। इसके लिए वे सजग हों और कानपुर को फिर से औद्योगिक नगरी का दर्जा दिलाएं।