इससे पहले वर्ष 1965 के युद्ध में जीनेट विमान उड़ा रहे एयर मार्शल सिकंद, जो उस समय स्क्वाड्रन लीडर थे, अपने दल के अन्य विमानों व पायलट से अलग होकर रास्ता भटक गए थे। भारत से उनका संपर्क कट गया था और विमान में तकनीकी खराबी आने के साथ ईंधन भी खत्म होने वाला था। उस समय वे सियालकोट के निकट पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित पसरूर के ऊपर थे। वहां हवाई पट्टी देख उन्होंने विमान वहीं उतार दिया। उन्हें भी गिरफ्तार कर पूछताछ की गई लेकिन जिन परिस्थितियों में उन्होंने विमान उतारा, उन्हें देखते हुए कुछ दिन बाद रिहा कर दिया गया।
इसके अलावा भारतीय वायुसेना का एक चेतक हेलिकाप्टर अक्टूबर, 2011 में खराब मौसम की वजह से रास्ता भटक कर पाक अधिकृत कश्मीर में घुस गया था। यह हेलिकाप्टर जम्मू कश्मीर के लदाख क्षेत्र में लेह से उड़ा था और इसे कारगिल के निकट द्रास सेक्टर में भीमभाट में उतरना था। नियंत्रण रेखा पार करने के कारण इसे पाकिस्तान सेना ने लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया था। इसमें सवार दो पायलटों, एक जूनियर कमीशंड अफसर और एक इंजीनियर को हिरासत में ले लिया गया था। सामान्य परिस्थिति होने के कारण उन्हें सामान्य पूछताछ के बाद भारत को सौंप दिया गया था।