पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान भारत ने 25000 करोड़ रुपये का निर्यात किया, जबकि ईरान से भारत ने करीब 96,000 करोड़ रुपये सालाना वस्तुओं का आयात किया। इस तनाव का असर बासमती चावल निर्यात करने वाली कंपनियों पर देखने को मिल सकता है।
इसी तरह चाय-कॉफी वाली कंपनियों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। भारत में तेल एलएनजी की आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। ऐसे में ईरान का संकट खाड़ी देशों में बढ़ा, तो बड़ी मुश्किल होगी और इससे दुनिया की एक बड़ी आबादी प्रभावित होगी।
खाड़ी समेत पश्चिम एशिया में तकरीबन एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जो हर साल करीब 70 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भेजते हैं। तनाव की स्थिति में जब भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है तो इस आय से वंचित होना भारत के लिए भारी पड़ सकता है।
दूसरी मुश्किल चाबहार बंदरगाह परियोजना पर होगी जो अफगानिस्तान को सीधे भारत से जोड़ने का एकमात्र जरिया है। भारत को आशंका है कि युद्घ जैसी स्थिति में साथ न मिलने पर ईरान चाबहार मामले में अपने हाथ झटक सकता है।
इससे जहां भारत की अफगानिस्तान में सीधी पहुंच का रास्ता बंद होगा, बल्कि खाड़ी देशों से समुद्र के रास्ते द्विपक्षीय व्यापार में भी बाधा आएगी। जाहिर तौर पर ऐसी स्थिति में खाड़ी देशों से तेल आयात के रास्ते में भी अड़चनें आएंगी।