अधिकारियों के मुताबिक, खासतौर पर इस मामले में दक्षिण कोरिया के तरीके का अध्ययन किया गया है, जहां महामारी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जांच और संदिग्ध मामलों की डिजिटल ट्रैकिंग का तरीका अपनाया गया। ‘ट्र्रेस, टेस्ट और ट्रीट स्ट्रेटजी’ वाले कोरियाई मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्रशंसा मिली है। कई अन्य बड़े देशों की तरह दक्षिण कोरिया को इस महामारी से निपटने के लिए किसी लॉकडाउन का सहारा नहीं लेना पड़ा और उसके यहां व्यापारिक व आर्थिक गतिविधियां सामान्य तरीके से ही चल रही हैं।
चीन के काबू करने का तरीका भी परखा
चीन में ही कोरोना वायरस महामारी का कहर फैला था और 80 हजार से ज्यादा संक्रमितों व 3300 से ज्यादा की मौत के बावजूद चीन इसे काबू करने में सफल रहा। इस महामारी पर अब वहां लगभग पूरी तरह नियंत्रण पाया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास को उचित अधिकारियों से संपर्क साधकर सबसे बढ़िया मेडिकल तकनीक व उपकरणों की खरीद करने का लक्ष्य दिया गया है।
जर्मनी में पीड़ितों के मुकाबले मृतक संख्या पर काबू
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जर्मनी के प्रयासों को भी परखा जा रहा है, जहां इस महामारी के संक्रमितों की संख्या बड़े पैमाने पर होने के बावजूद इससे मरने वालों का आंकड़ा बेहद कम है। अग्रणी यूरोपीय अर्थव्यवस्था ने अपने कई कार निर्माताओं को वेंटिलेटरों व अन्य मेडिकल उपकरणों का निर्माण करने का आदेश दिया है।