भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। 2050 में भारत कई मामलों में अमेरिका से भी आगे होगा। वैश्विक शक्ति की बात करें या फिर आर्थिक और सामरिक शक्तियों की सबकुछ अब पश्चिम से पूर्व की तरफ बढ़ रहा है। विश्व की चार बड़ी अर्थव्यवस्था में से तीन एशिया पैसिफिक क्षेत्र में रहती हैं। 2025 तक विश्व की जनसंख्या का दो तिहाई हिस्सा यहीं रह रहा है। पिछले दिनों लॉवी इंस्टीट्यूट एशिया पैसिफिक के 25 देशों की अर्थव्यवस्था से लेकर व्यापार तक जो सबसे शक्तिशाली देश माने जाते हैं उनपर शोध किया गया और पता चला भारत इनमें चौथे स्थान पर है, पर क्यों।
अर्थव्यवस्था से लेकर सांस्कृतिक मामलें में भारत
यह शोध 114 संकेतकों के साथ किया गया है जिसमें अर्थव्यवस्था, सेना, लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर किया गया है। और इसमें पहले नंबर पर अमेरिका है, दूसरे पर चीन, तीसरे पर जापान और चौथे पर भारत है।
2050 तक भारत जीडीपी मामले में अमेरिका को पछाड़ कर आगे होगा
कई पहलुओं पर किए गए शोध में यह सामने आया है कि अर्थव्यवस्था के विकास और विकास क्षमता के रूप में भारत को एक बड़ी खाई पाटनी है। चीन के साथ अगर देश के सकल घरेलू आय (जीडीपी) की बात की जाए तो इसे पाटने में काफी समय लगेगा। जीडीपी के मामले में भारत, अमेरिका के काफी करीब है और माना ये जा रहा है कि आने वाले 11 वर्षों में भारत अमेरिका के बराबर होगा और 2050 तक इससे काफी आगे निकल जाएगा।
economic growth
सिर्फ पांच देशों के जीडीपी पर नजर डाले तो 2016 में भारत चीन, अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर स्थित है जबकि जापान और रूस से आगे है। 2016 में चीन की 21.3 ट्रिलियन डॉलर, अमेरिका 18.6 ट्रिलियन डॉलर और भारत 8.7 ट्रिलियन डॉलर का था। यह तीन पीपीपी (परचेजिंग पावर पारिटी) पर आधारित है यानि जनसंख्या के खरीदारी और व्यापार की स्थिति पर इसका आंकड़ा तैयार किया गया है। शोध में यह माना गया है कि 2030 तक चीन का पीपीपी बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर होगा और 2050 तक 58.5 ट्रिलियन डॉलर तक होगा।
वहीं अमेरिका 18.6 ट्रिलियन से बढ़कर 2030 तक 23.5 ट्रिलियन डॉलर होगा लेकिन 2050 तक इसका ग्रोथ रेट 34.1 ट्रिलियन डॉलर का होगा जबकि भारत इससे कहीं आगे निकल जाएगा। यह 8.7 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 19.5 ट्रिलियन डॉलर का होगा जबकि 2050 तक 44.1 ट्रिलियन डॉलर का होगा। जापान भी आने वाले 20 वर्षों में नीचे की ओर जाएगा और 4.9 ट्रिलियन डॉलर से बढकर 2030 तक यह 5.6 ट्रिलियन डॉलर होगा और 2050 छलांग मारकर आगे निकल जाएगा। रूस 2016 के 3.7 ट्रिलियन से बढ़कर 7.1 ट्रिलियन डॉलर की स्थिति होगी।
भारत में लिस्टेड कंपनी
भारत अभी कई मामलों में विश्व से नौकरी और रोजगार के मामले में काफी पीछे है। हम यहां बात कर रहे हैं पब्लिक लिस्टेड कंपनी की। लिस्टेड कंपनियों के मामले में दक्षिण कोरिया भी हमसे आगे है। अमेरिका 564 लिस्टेड कंपनियों के साथ नंबर एक पर है जबकि चीन 262 कंपनियों के साथ नंबर दो और 229 कंपनियों के साथ जापान नंबर तीन पर है।
उत्पादकता, शोध और विकास मामले में हम हैं पिछड़े
अगर उत्पादकता की बात करें तो 25 देशों में भारत काफी पिछड़ा हुआ है उत्पादकता के मामले में हम 17 वें स्थान पर हैं जबकि शोध और विकास मामलों में खर्च करने के मामले में हम 12वें स्थान पर हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि हम संसाधनों और जनशक्ति का लाभ उठाने में कहीं न कहीं असमर्थ हैं।
व्यापार के मामले में भारत पीछे
लॉवी द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि भारत अभी कई मामलों में चीन से काफी पीछे है। 2016 के वैश्विक निर्यात पर नजर डालें तो भारत का व्यापार जहां 430 बिलियन डॉलर का था जबकि चीन का 2.8 ट्रिलियन डॉलर और अमेरिका का 2.2 ट्रिलियन डॉलर का था।