चीन की उकसाने वाली कार्रवाई और बयानों के बावजूद भारत दोकलम पठार पर अपने पुराने रुख से पीछे नहीं हटेगा। विवाद टालने के लिए कूटनीतिक पहल के दौरान भारत ने चीन को अपने रुख से लगातार अवगत कराया है। संबंधों में आई तल्खी के बीच अपने समुद्री सीमा पर चीनी पनडुब्बियों की उपस्थिति से भी भारत सतर्क है।
दोकलम पर कब्जा कर भारत पर युद्ध की स्थिति में बढ़त लेने की चीनी रणनीति के कारण दोनों देशों के बीच बीते तीन हफ्ते से जारी तनाव और लंबा खिंच सकता है। चीन जहां अपने अड़ियल रुख पर अडिग रहने के साथ बार-बार युद्ध की संभावना जता रहा है। वहीं भारत ने भी कदम पीछे न खींचने का साफ-साफ संदेश चीन को दे दिया है।
इस बीच अपनी समुद्री सीमा में चीनी पनडुब्बियों की कई बार हुई घुसपैठ के बाद भारत और सतर्क हो गया है। भड़काऊ बयानबाजी, युद्ध की धमकी और उकसाने वाली कार्रवाईयां दरअसल चीन की भारत के साथ-साथ भूटान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने चुंबी घाटी में किसी प्रकार का परिवर्तन, निर्माण कार्य करने से पहले भारत, चीन और भूटान के बीच सहमति बनाने संबंधी साल 2012 के समझौते की याद दिलाई है। कूटनीतिक पहल के दौरान यह भी साफ कर दिया है कि भारत इस मामले में भूटान का साथ देता रहेगा, इसके अलावा वह दोकलम पहाड़ से संबंधित किसी भी जगह पर किसी प्रकार के निर्माण की इजाजत नहीं देगा।