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INS Vikrant: देश को आज मिलेगा स्वदेशी विक्रांत, बदलेगा अंग्रेजों के जमाने का नौसेना का निशान

Fri, 02 Sep 2022 09:42 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, कोच्चि।

सार

INS Vikrant: प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम के दौरान नौसेना के एक नए निशान (इनसाइन) का भी अनावरण करेंगे। यह औपनिवेशक अतीत को पीछे छोड़ते हुए समृद्ध भारतीय समुद्री धरोहर का प्रतीक होगा। नौसेना के नए डिजाइन में एक सफेद ध्वज है, जिस पर क्षैतिज और लंबवत रूप में लाल रंग की दो पट्टियां हैं।
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आईएनएस विक्रांत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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INS Vikrant: भारतीय नौसेना के लिए शुक्रवार का दिन अहम होगा। उसे पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) मिलेगा और अंग्रेजों के जमाने के निशान से आजादी मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईएनएस विक्रांत को देश को समर्पित करेंगे। कोचीन शिपयार्ड पर तैयार किए गए इस विमान वाहक पोत के निर्माण में 20,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस पोत के आधिकारिक तौर पर शामिल होने से नौसेना की ताकत दोगुनी हो जाएगी।

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वहीं, मोदी कार्यक्रम के दौरान नौसेना के एक नए निशान (इनसाइन) का भी अनावरण करेंगे। यह औपनिवेशक अतीत को पीछे छोड़ते हुए समृद्ध भारतीय समुद्री धरोहर का प्रतीक होगा। नौसेना के नए डिजाइन में एक सफेद ध्वज है, जिस पर क्षैतिज और लंबवत रूप में लाल रंग की दो पट्टियां हैं। साथ ही, भारत का राष्ट्रीय चिह्न (अशोक स्तंभ) दोनों पट्टियों के मिलन बिंदु पर अंकित है।

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झंडे का महत्व
भारतीय नौसेना के वर्तमान ध्वज के ऊपरी बाएं कोने में तिरंगे के साथ सेंट जॉर्ज क्रॉस है। भारतीय नौसेना ब्रिटिश काल में ही अस्तित्व में आ गई थी। दो अक्टूबर, 1934 को नौसेना सेवा का नाम बदलकर रॉयल इंडियन नेवी किया गया था। 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणतंत्र बनने के साथ रॉयल को हटा दिया गया और इसे भारतीय नौसेना का नाम दिया गया। हालांकि, ब्रिटेन के औपनिवेशिक झंडे को नहीं हटाया गया। अब पीएम मोदी भारतीय नौसेना को नया ध्वज देंगे।
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निर्माण में लगे 13 साल

  • फरवरी 2009 में निर्माण की हुई थी शुरुआत 
  • अगस्त 2013 में पहली बार विक्रांत को पानी में उतारा गया
  • नवंबर 2020 में बेसिन ट्रायल शुरू हुआ
  • जुलाई 2022 में पूरा हुआ समुद्री ट्रायल
  • जुलाई 2022 में कोचीन शिपयार्ड ने नौसेना को सौंपा 

20 हजार करोड़ की आई लागत

  • 76 फीसदी स्वदेशी सामान का उपयोग
  • एक टाउनशिप जितनी बिजली आपूर्ति 
  • 21 हजार टन से ज्यादा विशेष ग्रेड स्टील का इस्तेमाल
  • 2,600 किलोमीटर से ज्यादा इलेक्ट्रिक केबल का इस्तेमाल
  • 150 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन

61.6 मीटर ऊंचाई यानी 15 मंजिला इमारत जितनी

  • 262.5 मीटर लंबाई 
  • 1600 क्रू की संख्या
  • 2300 कंपार्टमेंट

 

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