डीआरडीओ में LCA-MK-II को लेकर हुई बात
अमर उजाला को वायुसेना सूत्रों से मिला जानकारी के मुताबिक पिछले शुक्रवार को डीआरडीओ भवन में डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर कामत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के साथ LCA-MK-II के विकास कार्यक्रम को लेकर चर्चा की गई। इस समीक्षा बैठक में एरोनॉटिकल डेवलेपमेंट एजेंसी (ADA) के साथ फुल स्केल इंजीनियरिंग डेपलपमेंट (FSED) को लेकर चर्चा हुई। इस बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि LCA-MK-II का प्रोटोटाइप 2025 की शुरुआत तक आना था, लेकिन उसमें एक साल की देरी हो रही है। इसकी वजह इंजन सौदे से जुड़ी स्वीकृत धनराशि जारी होने में हो रही देरी को माना जा रहा है। वहीं, एलसीए मार्क-1 और मार्क-1ए में जहां अमेरिकी कंपनी जीई-404 के इंजन लगे होंगे, तो एलसीए मार्क-2 में भारत में ही बने ज्यादा एडवांस फीचर वाले जीई एफ-414 लगाए जाएंगे।
83 तेजस मार्क 1ए की डिलीवरी में हो रही देरी
तेजस मार्क 2 में न केवल स्वदेशी होगी, बल्कि इसमें प्रायमरी सेंसर के तौर पर उत्तम रडार लगा होगा। वहीं स्वदेश मे बना AESA रडार भी अंडर डेवलपमेंट है, जिन्हें अपग्रेड प्रोग्राम के तहत Su-30 MKI लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। तेजस मार्क 2, जिसे मध्यम वजन का लड़ाकू विमान (MWF) भी कहा जाता है, का कुल वजन 17 टन होने की उम्मीद है और यह तेजस मार्क-1A से बड़ा है, जिसका वजन 13.5 टन है। सूत्रों ने बताया कि भारत जीई के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने से पहले ही तेजस मार्क-2 के प्रोटोटाइप की फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एडवांस में कुछ जीई एफ-414 इंजन देने की बात कही है। इसकी वजह है कि एचएएल को जीई इंजन की सप्लाई में देरी की वजह से भारतीय वायुसेना को 83 तेजस मार्क 1ए जेट की डिलीवरी में देरी हुई है। मार्क-1ए में लगने वाले जीई-404 इंजनों की डिलीवरी इस साल मार्च में शुरू होने वाली थी, लेकिन अब वह सितंबर 2024 तक पहुंच गई है।
2010 में शुरू हुआ था एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम
वहीं सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने हाल ही में AMCA विमान के डिजाइन और विकास को मंजूरी दी है। एएमसीए को 2010 में लॉन्च किया गया था और इसमें भी काफी देरी हुई है। एएमसीए फाइटर जेट की पहली उड़ान 2024-2025 में होनी थी। इस प्रोजेक्ट में चार साल के फ्लाइट-टेस्टिंग प्रोग्राम को पूरा करने के लिए 5 प्रोटोटाइप चाहिए। जबकि 2028 या 2029 तक इसका प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी थी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) का प्रोडक्शन 2035 तक ही शुरू होने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि AMCA का प्रोटोटाइप 2028-29 तक ही पूरा हो पाएगा। वहीं AMCA प्रोजेक्ट की मंजूरी से एक दशक बाद यानी 2034-35 तक ही यह भारतीय वायुसेना में शामिल हो पाएगा। वहीं, इसके उलट चीन ने पहले ही 200 से ज्यादा पांचवीं पीढ़ी के जे-20 लड़ाकू विमानों को भारत से सटे बॉर्डर पर अपने एयरबेस पर तैनात कर दिया है। वहीं, जब तक भारत अपना पहला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान, एएमसीए भारतीय वायुसेना में आएगा, तब तक चीन के पास कम से कम 1000 जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान होंगे।

5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में पाकिस्तान
वहीं, चीन अब पांचवी पीढ़ी के बाद छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने की तैयारी कर रहा है। फरवरी 2023 में, एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) ने सोशल मीडिया पर अपनी छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का कॉन्सेप्ट शेयर किया था। इस कॉन्सेप्ट में डायमंड शेप्ड विंग्स और टेललेस डिजाइन की तस्वीरें दिखाई थीं। वहीं, भारत को खतरा अकेले चीन से नहीं है, बल्कि पाकिस्तान ने भी पांचवीं पीढ़ी के J-31 विमान खरीदने के लिए चीन से संपर्क साधा है और उसे ये विमान 2029 की शुरुआत में मिल सकते हैं। वहीं तब तक भारत के पहले AMCA का प्रोटोटाइप ही तैयार हो पाएगा। खास बात यह है कि भारत का एलसीए तेजस एमके-1 ने चीन के जेएफ-17 से पहले उड़ान भरी थी, लेकिन प्रोडक्शन के मामले में लालफीताशाही का शिकार हो गया।
पाकिस्तान मीडिया का दावा है कि पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) के पायलटों ने चीन में चीनी एफसी-31 गिर्फाल्कन (जिसे पहले जे-31 के नाम से जाना जाता था) लड़ाकू विमान पर ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया है। जिसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि जल्द ही 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान पाकिस्तान को मिल सकते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान तुर्की के साथ 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम में शामिल होने और चीन से एफसी-31 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए भी बातचीत कर रहा है।
भारत को कठोर फैसले लेने की जरूरत
पूर्व वायुसेना उप प्रमुख (रि.) एयर मार्शल अनिल खोसला का कहना है, "भारत को कुछ कठोर फैसले लेने की जरूरत है। एलसीए एमके1ए में देरी हो गई है। विमान का प्रोडक्शन अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक की तरफ होने वाले इंजन की सप्लाई पर निर्भर है। इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के चलते इस्राइल से रडार की डिलीवरी में भी देरी की संभावना है। एलसीए एमके1ए में देरी का असर एलसीए एमके2 और एएमसीए पर भी पड़ सकता है।" वह कहते हैं कि वायुसेना तुरंत राफेल लड़ाकू विमानों के दो और स्क्वाड्रन खरीदे और हालात की समीक्षा करे। यह घबराहट में खरीदारी नहीं है, बल्कि यह एक जरूरत है। एयर मार्शल खोसला कहते हैं कि भारतीय वायुसेना को अपनी जरूरतें पूरी करने लिए तुरंत 114 मल्टी रोल फाइटर एय़रक्राफ्ट (MRFA) चाहिए। वहीं, राफेल का एक फायदा यह भी है कि वायुसेना के पास पहले से ही ये विमान हैं, जबकि नौसेना जल्द ही राफेल-एम (मरीन) को अपने बेड़े शामिल करने वाली है।
2007 में MMRCA के तहत 126 जेट खरीदने का फैसला
इससे पहले भारतीय वायुसेना ने अगस्त 2000 में 126 मिराज 2000 II विमान खरीदने का प्रस्ताव दिया था। 2004 में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया और 2007 में MMRCA के तहत 126 जेट खरीदने का फैसला लिया गया। इससे पहले, भारतीय वायुसेना ने मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) सौदे के तहत नए लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया लगभग 15 सालों तक जारी रखी थी, लेकिन भारत सरकार ने इसे रद्द कर दिया और सीधे फ्रांस सरकार से 36 राफेल विमान खरीद लिए।
भारतीय वायु सेना के पास काफी संख्या में पुराने लड़ाकू विमान हैं। वायु सेना चाहती है कि अगले 10-15 वर्षों में मिराज 2000, जगुआर और मिग-29 के बेड़े को 250 से ज्यादा एलसीए मार्क-2 फाइटर जेट्स से बदला जाए। इसके अलावा, भारतीय वायु सेना ने 180 एलसीए मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर दिया है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि एलसीए मार्क-1ए का उत्पादन 2032 तक पूरा होने की संभावना है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि भारत के पास इस कमी से निपटने के लिए तीन विकल्प हैं। या तो वह यूएस एफ-35 लाइटनिंग II या फिर रूसी एसयू-57 फेलन खरीदे। नहीं, तो जीसीएपी (ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम) या एफसीएएस (फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम) फाइटर डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए यूरोपीय देशों में किसी को सह-भागीदार बनाए।
भारत के पास राफेल के ये वर्जन खरीदने का ऑप्शन
वहीं, AMCA 2035 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होगी, इससे पहले भारत राफेल के F4 या F5 वेरिएंट का विकल्प चुन सकता है। इसके अलावा मीडियम मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कॉन्ट्रैक्ट के तहत 114 राफेल F4 खरीद सकता है। जिन्हें 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही बनाया जा सकेगा। इसके अलावा सबसे एडवांस वर्जन राफेल F5 खरीदने का भी ऑप्शन है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, और अगले डेढ़ दशक में इसके अधिकांश स्क्वाड्रन फेज आउट हो जाएंगे। जबकि भारत को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। मिग-21 बाइसन और मिग-29 के स्क्वाड्रन 2025 और 2035 तक चरणबद्ध तरीके से रिटायर हो जाएंगे। 2019 में पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट स्ट्राइक करने वाले फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों मिराज 2000 भी 2035 तक रिटायर कर दिए जाएंगे।