इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की हाल ही में हुई बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शिरकत की है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया। स्वराज ने इस्लामिक देशों के संगठन में इस्लाम के मतलब पर अपनी बात रखी।
जब फखरुद्दीन अली अहमद सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मोरक्को पहुंचे तो पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह याहया खान ने ओआईसी को धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि अगर भारत को इस सम्मेलन में बुलाया गया तो पाकिस्तान सम्मेलन का बहिष्कार कर देगा। पाकिस्तान इस संगठन का संस्थापक सदस्य था, इस कारण सम्मेलन शुरू होने से कुछ देर पहले ही भारत को दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया गया। लेकिन इस बात से अहमद तब अवगत हुए जब वह रबात शहर के अपने होटल से सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए निकल चुके थे। पाकिस्तान की हरकत के कारण उन्हें दरवाजे से ही वापस लौटना पड़ा।
लेकिन आज इस घटना को 50 साल हो गए हैं। हालात बिलकुल उलट गए हैं। इस बार ओआईसी ने पाकिस्तान के बहिष्कार की धमकी को दरकिनार कर दिया है। इसके साथ ही मेजबान संयुक्त अरब अमीरात ने ना केवल भारत को इसमें शामिल होने का न्योता दिया बल्कि उसे विशिष्ठ अतिथि का दर्जा भी दिया। वहीं एक अनोखी बात ये भी है कि इस बार स्म्मेलन में पाकिस्तान की कुर्सी खाली रही।