भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर फंसी गुत्थी सुलझने की राह आसान नजर आ रही है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए भारत आया अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सकारात्मक संकेत देकर लौटा है। वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि कहा कि चार दिन तक चले विचार विमर्श के बाद आने वाले हफ्तों में बीटीए को लेकर क्षेत्रवार बातचीत का निर्णय लिया गया है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि भारत के साथ बातचीत सही रास्ते पर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टैरिफ के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बात बन जाएगी।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच की अध्यक्षता वाले दल ने आने वाले हफ्तों में बीटीए के तहत क्षेत्रीय विशेषज्ञ-स्तरीय वर्चुअल बैठकें करने पर सहमति जताई है। इनसे व्यक्तिगत रूप से प्रारंभिक दौर की वार्ता का मार्ग प्रशस्त होगा। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने निष्पक्षता, राष्ट्रीय सुरक्षा और रोजगार सृजन सुनिश्चित करने के साझा उद्देश्य को साकार करने के लिए मंथन किया। इसमें दोनों पक्षों ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग व बाजार पहुंच को और बढ़ाने, टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और पारस्परिक रूप से लाभकारी तरीके से आपूर्ति शृंखला एकीकरण को गहरा करना शामिल है।
अमेरिका ने की है इन चीजों पर शुल्क रियायत की मांग
अमेरिका ने भारत से कुछ औद्योगिक वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, वाइन, पेट्रोकेमिकल उत्पादों, डेयरी, सेब, ट्री नट्स और अल्फाल्फा घास जैसे कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में शुल्क रियायतों की मांग की है। हालांकि भारत कपड़ा जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों के लिए शुल्क में कटौती पर विचार कर सकता है। भारतीय उद्योग और निर्यातकों ने सरकार से उन्हें अमेरिका के पारस्परिक शुल्कों से बचाने के लिए कहा है। उन्होंने उन शुल्कों से छूट मांगी है क्योंकि इससे उन्हें बहुत नुकसान होगा क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अमेरिका भारत पर अमेरिकी व्यवसायों के लिए कृषि क्षेत्र को खोलने की भी मांग कर रहा है।
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डेयरी व कृषि क्षेत्रों को शामिल नहीं करेगा भारत
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत व्यापार वार्ता में डेयरी और कृषि को शामिल नहीं करेगा क्योंकि यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। 2024 में भारत को अमेरिका का कृषि निर्यात 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर था। प्रमुख निर्यातों में बादाम (खोल में - 86.8 करोड़ डॉलर); पिस्ता (12.1 करोड़ डॉलर), सेब (2.1 करोड़ डॉलर), इथेनॉल (एथिल अल्कोहल 26.6 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।
लाभकारी क्षेत्र के लिए बनी सहमति
मंत्रालय ने कहा, पारस्परिक रूप से लाभकारी, बहु-क्षेत्रीय बीटीए की दिशा में अगले कदमों को लेकर मोटे तौर पर सहमति बनी है। भारत और अमेरिका ने समझौते के पहले चरण को 2025 (सितंबर-अक्तूबर) तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 190 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करके 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।
भारत को टैरिफ का दुरुपयोग करने वाला नहीं कह सकते : रे विकरी
व्यापार विकास के लिए पूर्व अमेरिकी सहायक वाणिज्य सचिव रे विकरी ने कहा कि भारत पर टैरिफ का दुरुपयोग करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनका प्रशासन अमेरिका के साथ नाजुक व्यापार संबंधों का प्रबंधन करना जारी रखेगा। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वार्ता पर उन्होंने कहा कि तत्काल कुछ नहीं होगा, हालांकि इस बात पर चर्चा होगी कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में अमेरिका फर्स्ट को कैसे लागू किया जा रहा है।
10 फीसदी टैरिफ पर अमेरिका से निर्यात में भारत को हो सकता है 6 अरब डालर का नुकसान : एमके
शोध एवं निवेश फर्म एमके ग्लोबल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि यदि 10 फीसदी का व्यापक टैरिफ लागू किया जाता है, तो भारत को अमेरिका को निर्यात में लगभग 6 अरब अमेरिकी डॉलर या अपने सकल घरेलू उत्पाद का 0.16 फीसदी का नुकसान हो सकता है। वित्तीय सेवा कंपनी ने रिपोर्ट में कहा कि यदि टैरिफ 25 फीसदी तक बढ़ जाता है, तो प्रभाव काफी बढ़ सकता है, जो 31 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि पारस्परिक टैरिफ उपायों की विशिष्टता अनिश्चित बनी हुई है, लेकिन भारत पर एक व्यापक देश-स्तरीय टैरिफ सबसे संभावित परिदृश्य प्रतीत होता है।
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