27 देशों के यूरोपीय संघ के जलवायु नीति प्रमुख फ्रैंस टिमरमन्स ने शुक्रवार को कहा, संघ के प्रस्तावित कार्बन टैक्स का भारत के साथ उसके व्यापार संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। वह ऐसा कुछ भी नहीं करेगा जिससे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन हो। वे भारत के दो दिवसीय महत्वपूर्ण राजनयिक मिशन पर पहुंचे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर इस साल के अंत में दुबई में होने वाले कॉप28 पर चर्चा करना है।
यूरोपीय संघ ने स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम, लोहा, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन जैसे उच्च कार्बन युक्त सामग्रियों पर 25 से 30 प्रतिशत कार्बन आयात कर लागू करने की योजना बनाई है। इसके चलते विकासशील देशों को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं, क्योंकि इनकी अर्थव्यवस्थाएं कार्बन का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों पर अत्यधिक मात्रा में निर्भर हैं। यूरोपीय संघ की जलवायु रणनीति सदस्य देशों को कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरणीय उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। इसके लिए संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) अक्तूबर में अपनी प्रस्तावित कर प्रणाली को लागू कर सकता है।
भारत के साथ राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर कंबोडिया के राजा नोरोडोम सिहामोनी 29 मई से 31 मई तक भारत की राजकीय यात्रा पर होंगे। कंबोडिया के राजा की भारत की राजकीय यात्रा लगभग छह दशकों के बाद हो रही है। यह यात्रा 1952 में स्थापित भारत और कंबोडिया के बीच संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को चिह्नित करेगी। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) सौरभ कुमार ने कहा, उनके साथ रॉयल पैलेस के मंत्री, सीनेट के अध्यक्ष, विदेश मामलों के मंत्री और अन्य अधिकारियों सहित 27 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल होगा।