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China: LAC पर चीन को धूल चटाने के लिए भारत इन एयरबेस को कर रहा अपग्रेड, ऑर्डर ऑफ बैटल में होगा बड़ा बदलाव!

हरेंद्र चौधरी
Updated Fri, 21 Jun 2024 07:38 PM IST

सार

रक्षा सूत्रों का कहना है कि चीन की बड़ी तैयारियों को देखते हुए 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लेह स्थित रनवे के साथ 2000 मीटर लंबा दूसरा रनवे बनाने का फैसला किया गया। वहीं मौजूदा रनवे लगभग 2752 मीटर लंबा है। इसके अलाव यहां जहाजों के लिए नए शेल्टर और नई बिल्डिंग बनाई जा रही हैं। यह रनवे भारत के लिए सामरिक दृष्टि से भी बहुत अहम है। 
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एलएसी पर आमने-सामने भारत और चीन। - फोटो : अमर उजाला


चीन 37 हवाई अड्डों को कर रहा डेवलप

इस साल अप्रैल में चीन के हॉटन एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें जारी हुई थीं। इन तस्वीरों में साफ नजर आया था कि चीन बड़े स्तर पर सामरिक तैयारियां कर रहा है। हॉटन एयरबेस में चीन ने एक रनवे चालू होने के बावजूद दूसरा रनवे बनाया था, ताकि जंग के हालात में बड़े ट्रांसपोर्ट जहाजों और फाइटर जेट्स को वहां तैनात किया जा सके। भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए हॉटन एयरबेस बहुत ही महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र है और पूर्वी लद्दाख के सामने का क्षेत्र होटन के तहत आता है। जिसके बाद भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए लद्दाख के लेह एयरबेस पर भी एक नया रनवे बनाने का फैसला किया। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की चाइना पावर प्रोजेक्ट के अनुसार, डोकलाम गतिरोध के बाद से चीन तिब्बत और शिनजियांग में लगभग 37 हवाई अड्डों और हेलीपोर्टों को डेवलप कर रहा है। 


लेह एयरबेस पर बन रहा दूसरा रनवे

रक्षा सूत्रों का कहना है कि चीन की बड़ी तैयारियों को देखते हुए 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लेह स्थित रनवे के साथ 2000 मीटर लंबा दूसरा रनवे बनाने का फैसला किया गया। वहीं मौजूदा रनवे लगभग 2752 मीटर लंबा है। इसके अलाव यहां जहाजों के लिए नए शेल्टर और नई बिल्डिंग बनाई जा रही हैं। यह रनवे भारत के लिए सामरिक दृष्टि से भी बहुत अहम है। सर्दियों में जब सड़क मार्ग बर्फबारी से बंद हो जाता है, तो इसी एयरबेस से जरूरी सामान की सप्लाई होती है। लेह एयरबेस भारत और चीन के बॉर्डर यानी एलएसी के नजदीक स्थित है और यहीं से सियाचिन के लिए रसद और सैन्य साजोसामान की सप्लाई होती है। साथ ही, इस एयर बेस से रात में भी उड़ान भरने के लिए उपयुक्त है। भारत ने इसी एयरबेस पर राफेल, मिग-29, सुखोई-30 फाइटर जेट और अपाचे हेलीकॉप्टर तैनात कर रखे हैं। 15-16 जून 2020 में जब गलवान में हिंसक झड़प हुई थी, तब इसी एयरबेस से 68 हजार भारतीय सैनिकों और टैंकों को हवाई जहाजों से एलएसी तक पहुंचाया गया था। 


चबुआ एयरबेस पर लगाए नए रडार

चीन से उत्पन्न हो रहे खतरे को देखे हुए एलएसी के नजदीक और पूर्वी कमान के तहत आने वाले असम के डिब्रूगढ़ में स्थित चबुआ एयरबेस को भी भारत ने अपग्रेड किया है। भारत ने चबुआ एयरबेस पर नए रडार भी स्थापित किए हैं, ताकि इस क्षेत्र में हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में मदद मिल सके। इसके अलावा अतिरिक्त टैक्सीवे, हमलावर हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों के लिए शेल्टर और भूमिगत हथियारों के भंडार बनाने का काम भी किया जा रहा है। इसके अलावा ड्रोन के इस्तेमाल के लिए टैक्सीवे बनाया गया है। 


'चिकंस नेक' के नजदीक बागडोगरा एयरबेस के रनवे में हो रहा सुधार

वहीं एलएसी के नजदीक पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में स्थित बागडोगरा एयरबेस को भी अपग्रेड करने का काम जोरशोर पर है। यह एयरबेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है, जिसे 'चिकंस नेक' भी कहा जाता है, जो पूर्वोत्तर के राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है। लेटेस्ट सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बागडोगरा एयरबेस के रनवे में बड़े सुधार किए जा रहे हैं। डोकलाम संकट के दौरान भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण बेस रहे बागडोगरा एयरबेस की कैपेसिटी और कैपिबिलिटी में व्यापक सुधार किया जा रहा है। यहां रनवे को लंबा करने से बड़े विमानों को उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी, जिसमें संभावित रूप से भारी परिवहन जेट और अधिक पेलोड वाले लड़ाकू स्क्वाड्रन शामिल होंगे। साथ ही, यहां भी टैक्सीवे में सुधार किया जा रहा है, ताकि विमानों के आने-जाने के रास्ते में कोई रुकावट न हो। इसके अलावा जहाजों के लिए नए मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर बनाए जा रहे हैं।  


लद्दाख स्थित न्योमा एयरबेस को किया जा रहा डेवलप

इसके साथ ही, पूर्वी लद्दाख में ही स्थित न्योमा एयरबेस के नवीनीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है। चीन की सीमा से सिर्फ 23 किलोमीटर की दूरी पर न्योमा एयरबेस में 2.7 किलोमीटर लंबे रनवे का निर्माण अक्तूबर 2024 तक पूरा हो जाएगा। इस एयरबेस पर बुनियादी ढांचा, हैंगर सहित एयर ट्रैफिक कंट्रोल भवन और हार्ड लैंडिंग (वाहनों और विमानों की पार्किंग के लिए कठोर सतह वाले क्षेत्र) जैसी सुविधाएं होंगी, जो 2025 के अंत तक पूरी हो जाएंगी। रक्षा सूत्रों का कहना है कि न्योमा लेह के मुताबले बेहतर और समतल घाटी में है और एलएसी के नजदीक है। नया 13,700 फीट लंबा रनवे भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू और परिवहन संचालन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण साबित होगा। न्योमा हवाई पट्टी को 1962 चीन युद्ध के बाद इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। 2009 में एक एएन-32 विमान के यहां उतरने के बाद इसे फिर से चालू कर दिया गया। उसके बाद से सी-130जे सुपर हरक्युलेस विमान इस एयरबेस से उड़ान भरते रहे हैं। उसके बाद 2020 में गलवान हिंसा के बाद वायुसेना ने Mi-17, चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टरों को न्योमा भेजा था।


ऑर्डर ऑफ बैटल में बदलाव!

वहीं भारतीय सेना चीनी सेना का मुकाबला करने के लिए ऑर्डर ऑफ बैटल (ओआरबीएटी) में भी महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सेना पूर्वी लद्दाख में एक नई डिवीजन की तैनाती की भी योजना बना रही है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक नॉर्दन कमांड के तहत पूर्वी लद्दाख में संभावित तैनाती के लिए 72 डिवीजन को बढ़ाने पर विचार कर रही है। 2013 में 17 माउंटेन स्टाइक कोर को मंजूरी दी गई थी, इसके तहत दो डिवीजन बनाई जानी थीं। लेकिन केवल पानागढ़ स्थित 59 डिवीजन का गठन किया गया था और 72 डिवीजन को वित्तीय कारणों से रोक दिया गया था। अब इस डिवीजन को बढ़ाने की योजना पर हाल ही में सेना के शीर्ष अधिकारियों ने चर्चा की है। 17 माउंटेन स्टाइक कोर के तहत एक स्ट्राइक कोर डिवीजन के रूप में कार्य करने के बजाय, इसे पूर्वी लद्दाख में संभावित तैनाती के लिए नॉर्दन कमांड के तहत लाने का फैसला लिया गया है। सूत्रों ने बताया कि नई डिविजन की पूर्वी लद्दाख में तैनाती होने के बाद पूरी नॉर्दन कमांड में सैनिकों की लंबे समय की तैनाती का फिर से आकलन किया जाएगा। 
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सेना के पास चार स्ट्राइक कोर

सेना के पास चार स्ट्राइक कोर हैं – मथुरा स्थित 1 कोर, अंबाला स्थित 2 कोर, भोपाल स्थित 21 कोर और पानागढ़ स्थित 17 माउंटेन स्टाइक कोर। इनमें से केवल 17 माउंटेन स्टाइक कोर का ही केवल चीन पर फोकस था। जबकि बाकी तीन का फोकस पाकिस्तान पर था। लेकिन 2020 में गलवान में सैन्य गतिरोध के बाद मथुरा स्थित 1 कोर, 17 कोर का पुनर्गठन किया गया।
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