काबुल एयरपोर्ट के बाहर लगी अफगानियों की भीड़
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अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यहां की राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है। खुद अफगानिस्तान के लोग देश में नहीं रहना चाहते हैं और किसी भी तरह वहां से निकलना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए भारत अच्छी पनाहगाह साबित हो सकता है। जानकारों का कहना है कि अफगानी लोगों के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत सिविल सोसायटी सदस्यों, विचारकों, महिला कार्यकर्ताओं, छात्रों और एनजीओ कार्यकर्ताओं को वीजा देने में प्राथमिकता देगा।
जो अफगानी नागरिक खतरा महसूस कर रहे हैं या तालिबानी शासन से डरे हुए हैं और जिन्होंने विभिन्न लाभकारी विकास योजनाओं को शुरू करने में भारत का सहयोग किया था, उन्हें भी वीजा देने में प्राथमिकता दी जाएगी। समाचार एजेंसी पीटीआई ने इस मामले में गतिविधियों की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से कहा है कि भारत सरकार कि तत्काल प्राथमिकता काबुल में फंसे भारतीय लोगों को वहां से वापस लाना है। इसके लिए वह अमेरिका और अन्य भागीदार देशों से संपर्क में है।
जानकारी के अनुसार ऐसे नागरिकों की वापसी के लिए योजना तैयार कर ली गई है और इस काम को जल्द ही अंजाम दिया जाएगा। बता दें कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट के डर के बीच ब्रिटेन और कनाडा जैसे कुछ देश पहले ही अफगानी शरणार्थियों के लिए पुनर्वास योजनाओं की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, कुछ अन्य देशों ने अफगानियों को अस्थायी शरण देने पर सहमति जताई है। भारत अफगानिस्तान में एक प्रमुख हिस्सेदार रहा है और यहां करीब 300 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सरकार की अन्य प्राथमिकता अफगानिस्तान में फंसे हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को लाना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस समय सरकार ऐसे सभी लोगों की जानकारी एकत्र करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो वर्तमान में अफगानिस्तान में रह रहे हैं। इसके लिए एक विशेष सेल गठित की जा चुकी है। इसके अलावा कठिन परिस्थितियों के बीच अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों, राजनयिकों और अन्य कर्मचारियों को भारत वापस लाया जा चुका है।
कतर के विदेश मंत्री से मिले जयशंकर
दूसरी ओर, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने शुक्रवार को कतर के दोहा में उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों के मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थनी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में हालात पर अपने विचार साझा किए। इससे पहले गुरुवार को जयसंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा था कि भारत और अफगान लोगों के संबंध ऐतिहासिक हैं और मैं यह समझता हूं कि ये महत्वपूर्ण संबंध हमारे विचारों को मार्गदर्शन देना जारी रखेंगे।