भारत सोमवार को ब्रिक्स के पर्यावरण कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) के वरिष्ठ अधिकारियों और जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर संपर्क समूह की मेजबानी करेगा। इसके बाद मंगलवार को ब्रिक्स के पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक होगी।
यह कार्यक्रम नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य विषय (थीम) भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रखा गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में यह जानकारी दी।
ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह कब बना?
ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह की शुरुआत 2015 में मॉस्को में हुई पहली ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी। इस समूह को ब्रिक्स देशों के लिए एक ऐसे मंच के रूप में बनाया गया था, जहां वे-
- पर्यावरण से जुड़ी मूल और महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर काम कर सकें।
- अपने अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें।
- अच्छी और सफल कार्यप्रणालियों यानी बेहतर तरीकों को साझा कर सकें।
- सभी सदस्य देशों की मिलकर की जाने वाली पर्यावरण संबंधी कार्रवाई को मजबूत कर सकें।
जलवायु परिवर्तन पर संपर्क समूह कब बना?
जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की स्थापना 2024 में की गई थी। इसका मकसद ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग के लिए एक व्यवस्था तैयार करना है।
पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में कौन शामिल होगा?
मंत्रालय ने बयान में बताया कि बैठक में समूह के सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति बनाने वाले लोग और विशेषज्ञ शामिल होंगे। बैठक में अहम और गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही देशों के बीच सहमति बनाने और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर भी काम किया जाएगा।
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वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में क्या होगा?
वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में उद्घाटन सत्र होगा। इसके बाद ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) और जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर संपर्क समूह की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।
समूह की प्राथमिकताओं में क्या शामिल है?
- टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देना।
- पेड़ लगाना और वनों का विस्तार करना।
- जंगलों में लगने वाली आग का प्रबंधन करना।
- आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करना।
पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में क्या चर्चा होगी?
पर्यावरण मंत्रालय के बयान के मुताबिक, बैठक के दौरान अंतिम दस्तावेज के परिणाम पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, अलग-अलग जरूरी विषयों पर भी चर्चा होगी। इन चर्चाओं का मकसद यह दिखाना है कि ब्रिक्स के सभी सदस्य देश पर्यावरण संरक्षण में सहयोग और सतत विकास के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।