15 अगस्त 2017 को भारत अपनी आजादी की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। इन 70 सालों में भारत ने दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया है। फिर चाहें बात तकनीक की हो या व्यापार की, सेना की हो या शिक्षा की, हर क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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इन 70 सालों में न जाने कितने ऐसे क्षण आये जब भारत ने सफलता के चरम पर पहुंचकर दुनिया को अपना लोहा मनवाया हो। बढ़ते आधुनिकीकरण और प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने कई बार चीन और पाकिस्तान को यह बताया कि भले ही ये देश अपनी ताकत का कितना ही दम भरते हों, लेकिन भारत इनसे कहीं भी कम नहीं है।
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भारतीय सेना के बढ़े हुए मनोबल के सामने चीन और पाकिस्तानी सेना अपनी इज्जत बचाती नजर आयी। पाक सेना को तो भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में ऐसा जवाब दिया जिसे पाकिस्तानी सेना जिंदगी भर नहीं भूल पाएगी।
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भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक
surgical strike
सरकार के सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले का पूरे देश ने समर्थन किया, साथ ही गर्व महसूस किया। पिछले साल 18 सितम्बर के जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में एक आंतकी हमला हुआ। इस आतंकी हमले में भारतीय सेना के 18 जवान शहीद हुए थे।
पाकिस्तान की इस कायराना हरकत के बाद 29 सितम्बर 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ( पीओके ) में घुस कर पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की। सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय सेना ने आतंकियों के कई ठिकानों पर हमले किये और कई आतंकी ढ़ेर किये।
सेना ने इस ऑपरेशन के साथ उरी हमले में शहीद 18 सैनिकों का बदला लिया। बौखलाहट में पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भारतीय सेना की इस सर्जिकल स्ट्राइक का खंडन किया। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सरकार द्वारा कठोर फैसले के कारण कमजोर दिखने वाली सेना की भी इमेज में बदलाव देखने को मिला।
सर्जिकल स्ट्राइक से बढ़ा सेना का मनोबल
Indian Army
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सेना के मनोबल तेजी से बढ़ा। जिसके बाद परंपरागत और छद्म युद्ध सहित संभावित सभी तरह के सुरक्षा खतरों से पार पाने के लिए देश की तीनों सेनाओं ने गठजोड़ किया। नौसेना प्रमुख ने आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी देश विरोधी गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक ‘संयुक्त सिद्धांत’ का फॉर्मूला जारी किया।
इसके तहत हमले या देशविरोधी गतिविधियों के दौरान थल सेना, नौसेना और वायुसेना बेहतर तालमेल के साथ सैन्य ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक को प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल पर जोर दिया गया। संयुक्त सिद्धांत में सेना के जवानों का संयुक्त प्रशिक्षण, यूनिफाइड कमांड और नियंत्रित ढांचे के अलावा तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का प्रावधान है।
नया फॉर्मूला रणनीति और किसी ऑपरेशन को अंजाम देने में मददगार होगा। चाहे यह ऑपरेशन जमीन पर हो, आसमान में हो, समुद्र और अंतरिक्ष या साइबर स्पेस में ही क्यों न हो, एक व्यापक रूपरेखा के तहत काम होगा। नौसेना प्रमुख ने इस संयुक्त सिद्धांत को जारी किया था।
चीन पर भारत का आक्रामक रवैया
modi-xi jinping
भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। दोनों ही देशों में से कोई डोकलाम सीमा से पीछे हटने को तैयारी नहीं है। चीन के साथ बढ़ते विवाद को देखते हुए भारत कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। भारत ने चीन से लगी सीमा पर सेना के जवानों की तादाद बढ़ा दी है।
चीन से बढ़े विवाद के बीच एक विस्तृत विश्लेषण के बाद सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगे 1400 किमी की भारत-चीन सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया। डोकलाम क्षेत्र में सैन्य एयरबेस के मामले में भी भारत काफी सुदृढ़ स्थिति में है।
चीन को जहां तिब्बत में स्थित अपने बेस से सैन्य मदद मिलेगी वहीं भारत ने असम के तेजपुर में मजबूत सैन्य बेस बना ली है। यहां से एयरफोर्स के सुखाई 30 भी आसानी से उड़ान भर सकते हैं।
रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने दिया चीन को जवाब
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रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि भारतीय सेना देश की सुरक्षा के मोर्चे पर पैदा किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि हमने 1962 की लड़ाई से सबक सीखा है। उन्होंने यह भी कहा था कि हमने 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध से यही सबक सीखा है कि देश की सेना को अपने दम पर सक्षम होना होगा क्योंकि आज भी हम अपने पड़ोसियों से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 1962 की तुलना में 1965 और 1971 में हमारी सेना ज्यादा मजबूत थी। जिसके बाद चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में चीनी एक्सपर्ट ने कहा था कि भारत के रक्षा मंत्री अरुण जेटली के बयान के बाद दोनों देशों के बीच जंग की संभावना बढ़ गई हैं। चीन को सैन्य तैयारियां शुरु कर देना चाहिए।
भारत-चीन के बीच डोकलाम क्षेत्र में चल रहे विवाद पर चीनी मीडिया भले ही आग में घी डाल रहा हो लेकिन ग्राउंड जीरो पर भारत को कूटनीतिक जीत मिलती दिखाई दे रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डोकलाम में विवादित स्थल से चीनी सेना 100 मीटर पीछे हटने को तैयार हो गई है।
जबकि भारत अभी भी उसे 250 मीटर पीछे हटाने पर अड़ा हुआ है। चीन की तरफ से इस शर्त पर 100 मीटर पीछे हटने की बात कही गई है कि भारतीय सेना भी यहां पूर्व स्थिति में लौट जाए। इस संवाद व सहमति के पीछे डोकलाम इलाके से दोनों देशों की सम्मानजनक विदाई की भावना है।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के इस कदम को दोनों देशों द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से समस्या के हल करने की पहल के रूप में देखा जा सकता है।