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भारत की उपलब्धि: हवाईपट्टी पर विमान की तरह उतरा प्रक्षेपण यान, इसरो ने किया सफल परीक्षण, जानें इसकी खासियत

Sun, 02 Apr 2023 12:14 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ISRO के अनुसार, इस रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल ऑटोनॉमस लैंडिग मिशन को आज सुबह कर्नाटक के चित्रदुर्ग के एटीआर से संचालित किया गया।
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RLV LEX - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पुन: इस्तेमाल योग्य प्रक्षेपण यान के स्वायत्त लैंडिंग मिशन (आरएलवी-एलईएक्स) का रविवार सुबह सफल परीक्षण कर इतिहास रच दिया है। भारत का आरएलवी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के बाद किसी हवाई जहाज की तरह धरती पर लौट आएगा। भारत यह तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया है। इस तकनीक को हासिल करने के साथ भारत बार-बार इस्तेमाल हो सकने वाला प्रक्षेपण यान (आरएलवी) बनाने के करीब पहुंच गया है। खास बात यह है कि भारत का यह मिशन पूरी तरह स्वदेशी है।
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इसरो ने एक बयान में कहा, प्रक्षेपण यान की स्वायत्त लैंडिंग (एलईएक्स) का सफल परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें स्वत: लैंडिंग की स्थितियों को बिलकुल उस तरह डिजाइन किया गया था, जिस तरह अंतरिक्ष से पृथ्वी की कक्षा में लौटने वाले यान की स्थितियां होती हैं। गति, मानवरहित होना, लौटने का निर्धारित मार्ग जैसी स्थितियां अंतरिक्ष यान की तरह थीं। इसके अलावा लैंडिंग के मानदंड जैसे कि सतह संबंधी गति, लैंडिंग गियर्स के सिंक दर, सटीक बॉडी रेट, उसी तरह के थे जैसे अंतरिक्ष यान को अपने निर्धारित वापसी पथ में मिलते हैं।

विश्व में पहली बार, प्रक्षेपण यान के एक विंग बॉडी को एक हेलिकॉप्टर (चिनूक) की मदद से ऊंचाई पर ले जाकर हवाई जहाज की तरह रनवे पर स्वायत्त लैंडिंग के लिए छोड़ दिया गया। इसे बहुत अधिक ऊंचाई से 350 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार से लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया है। तकनीकी तौर पर ऐसा करने के लिए लो लिफ्ट और ड्रैग का सही अनुपात रखना जरूरी होता है, ताकि लैंडिंग के दौरान विमान का संतुलन बना रहे।
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आरएलवी को लेकर उड़ा चिनूक...आधे घंटे में लैंडिंग
वायुसेना का चिनूक हेलिकॉप्टर कर्नाटक के चित्रदुर्ग में वैमानिकी परीक्षण रेंज में आरएलवी को लेकर सुबह 7:10 बजे समुद्र तल से 4.5 किमी ऊंचाई तक गया। इसके बाद मिशन प्रबंधन कंप्यूटर की कमान के आधार पर आरएलवी को बीच हवा में 4.6 किमी की क्षैतिज दूरी से छोड़ दिया गया। आरएलवी ने एकीकृत नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण प्रणाली का उपयोग करते हुए सुबह 7:40 बजे स्वायत्त तरीके से लैंडिंग की।

इन देशों के पास है यह तकनीक
अमेरिका, रूस, चीन, स्पेन और न्यूजीलैंड। चीन अब भी भारत की तरह ही इसके विकास के चरण में है। आरएलवी को भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन व वायुसेना की मदद से बनाया गया है।

बेहतरीन उपलब्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे बेहतरीन उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा, बेहतरीन टीम प्रयास। इस उपलब्धि ने हमें ‘दोबारा उपयोग में लाए जा सकने वाले भारतीय प्रक्षेपण यान को साकार करने की दिशा में एक कदम और करीब ला दिया है।

और क्या रहा खास?
  • RLV LEX को भारतीय वायुसेना के चिनुक हेलीकॉप्टर से लाया गया। 
  • इसे 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाया गया और 4.6 किलोमीटर की रेंज पर छोड़ा गया। 
  • इसके छोड़ने के बाद रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल ने धीमी गति से उड़ान भरा। इसके कुछ देर बाद वह लैंडिंग गियर के साथ खुद ही एटीआर में लैंड किया। 
  • ISRO के साथ, भारतीय वायु सेना (IAF), सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC), वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE) और एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) ने इस परीक्षण में योगदान दिया।
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