भारत ने नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा के माध्यम से 22 गीगावॉट बिजली पैदा करने की योजना पेश की है, ताकि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटना जा सके। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी के साथ बैठक में परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन अजित कुमार मोहंती ने परमाणु ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत की महत्वाकांक्षी योजना साझा की।
मोहंती वार्षिक आईएईए सम्मेलन में भाग लेने के लिए वियना में हैं। ग्रॉसी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, नेट जीरो के लिए परमाणु ऊर्जा के माध्यम से 22 गीगावॉट तक पहुंचने की भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर मोहंती को बधाई।
वहीं, सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोहंती ने कहा, भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) विस्तारित निरंतर बिजली संयंत्र संचालन और उत्कृष्ट सुरक्षा बनाए रखने में रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है। 42 मौकों पर इसकी कुछ इकाइयां 365 दिनों और पांच मौकों पर 700 से भी अधिक दिनों तक लगातार संचालित होती रहीं। उन्होंने कहा कि गुजरात के काकरापार में यूनिट-3 ने हाल ही में अपनी तरह का पहला 700 मेगावाट का स्वदेशी दबावयुक्त भारी पानी रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) का वाणिज्यिक संचालन शुरू किया।
मोहंती ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, पहुंच, सामर्थ्य और परिवर्तन पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि भारत की अगुवाई में जिन देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा का उपयोग करने का विकल्प चुना है, उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने में अपनी भूमिका की पुष्टि की है। ये देश अब उन्नत और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) सहित नागरिक परमाणु प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, नवाचार, विकास और उन्हें स्थापित करने में सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहा कि जी-20 सम्मेलन में लचीली परमाणु आपूर्ति श्रृंखला बनाने, परमाणु संयंत्र निस्तारण और रेडियोधर्मी अपशिष्ट और ईंधन प्रबंधन को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। मोहंती ने भारत के परमाणु कार्यक्रम, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की प्रतिबद्धता और वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था आईएईए के साथ साझेदारी के लंबे इतिहास पर भी बात की।