रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुमोदित आपातकालीन आवश्यकताओं के तहत को हासिल हथियार खरीदने के लिए वायुसेना मे पिछले 50 दिनों में 7600 करोड़ रुपये से ज्यादा के करार किए हैं। बता दें कि पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने आपातकालीन प्रावधानों के तहत तीनों सेना प्रमुखों को यह ताकत दी थी कि वे तीन महीने में आपूर्ति की शर्त के साथ 300 करोड़ रुपये तक का करार कर सकते हैं।
रूस के साथ रक्षा उत्पादों के करार का अमेरिका शुरू से ही विरोध करता रहा है। रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदा करने पर अमेरिका ने भारत को चेतावनी भी दी थी कि ऐसा करने पर उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका यह भी कह चुका है कि वह भारत की सभी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है लेकिन, रूसी एस-400 मिसाइल सौदा इसमें बाधा बन रहा है।
भारत और अमेरिका, दोनों एक दूसरे का रणनीतिक साझेदार होने का दावा करते हैं, लेकिन पिछले दो दशकों से दोनों देशों के विवाद कई गुना बढ़ गए हैं, जिसमें रूस से 40 हजार करोड़ रुपये का एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने और ईरान से तेल खरीदने का मामला शामिल है।
अपने पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और चीन से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत रूस से एंटी टैंक मिसाइल ‘स्ट्रम अटाका’ का सौदा भी कर चुका है। इसके लिए दोनों देशों के बीच 200 करोड़ रुपये में करार हुआ है। इन मिसाइलों को एमआई-35 हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा। इसके बाद ये हेलीकॉप्टर दुश्मनों के टैंकों और अन्य हथियारबंद वाहनों को पलक झपटते नष्ट कर सकेंगे।