विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के रिश्तें नफा-नुकसान से परे हैं और दोनों देशों को सामरिक परिपक्वता के लिए एक दूसरे से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के सबंध जटिल है मगर संबंधों के सहयोगपूर्ण और सम्मिलित पक्ष की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जयशंकर ने कहा कि चीन से भारत के हितों का ध्यान रखने की उम्मीद की जाती है, खासकर तब जब उनका चीन के हितों से टकराव नहीं है।
एक सम्मेलन में बोलते हुए विदेश सचिव ने कहा, आतंकवाद से मुकाबला करने की जरूरत है। जाने पहचाने आतंकवादियों एवं संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे मतभेद नहीं होने चाहिए। ना हीं असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और निवेश तक भारत की पहुंच जैसे विकास से जुड़े मुद्दों पर आपत्ति होनी चाहिए। जयशंकर का साफ इशारा चीन द्वारा पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में डलवाने के भारत के प्रयास पर एतराज जताने और साथ ही एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध करने की ओर था।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए. इसका एक कारण दोनों के कंधों पर इस खास संबंध के इतिहास का भार होना है। उन्होंने कहा, पिछले तीन दशकों में हमारे संबंधों का रिपोर्ट कार्ड कल्पनाओं से ज्यादा मजबूत है। जयशंकर ने कहा कि सीमित संपर्क एवं सामग्री की स्थिति से भारत-चीन के संबंध आज असामान्यता की स्थिति से बाहर निकल चुके हैं और इसके लिए दोनों देशों की सरकारों को श्रेय दिया जाना चाहिए जिन्होंने बातचीत में गतिरोध के जारी रहने के बावजूद सीमा पर शांति सुनिश्चित की है।