जल विवाद का सहारा लेकर चीनी मीडिया ने नया पैतरा फेंका है। ब्रह्मपुत्र नदी का खुद गलत तरीके से दोहन कर रहे चीन ने भारत पर नदी के नाजायज दोहन का आरोप लगाया है और कहा है कि इससे बांग्लदेश के हित प्रभावित होंगे। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि बांग्लादेश अपने जल हितों के लिए भारत के खिलाफ कोई कदम न उठाने के लिए मजबूर है, क्योंकि उसे आर्थिक तौर पर भारत पर निर्भर रहना पड़ता है।
चीनी अखबार की खबर में यह भी कहा गया है कि भारत ब्रह्मपुत्र नदी से सटे देशों से इस बारे बात तक करने को तैयार नहीं, क्योंकि ऐसा करने बांग्लादेश को पहुंच रहा नुकसान भारतीय हितों के आड़े आ जाएगा।
दलअसल चीनी अखबर ने खुद की सफाई देते हुए संपादकीय छापा है, जिसमें चीन को पाक साफ और भारत को आरोपी ठहराया गया है। यानी चोरी की चोरी और सीना जोरी। चीन के मंसूबे भारत के लिए हमेशा से संदेहास्पद रहे हैं, ऐसे में यह कोई नई बात नहीं है कि चीन अब सरकारी मीडिया का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दुष्प्रचार में कर रहा है।
ब्रह्मपुत्र पर चीन के प्रोजेक्ट से किसी को नहीं कोई नुकसान-चीनी मीडिया
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अखबार में कहा गया है कि चीन ने एक बहुच खर्चीले पावर प्रोजेक्ट के तहत ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी का पानी रोका है। इस प्रोजेक्ट के तहत रोके गए पानी से किसी को भी कोई नुकसान नहीं होने वाला है। वहीं, भारत में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि चीन की कार्रवाई से अरुचाल में पानी की समस्या आ सकती है।
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत को इस मामले में प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी। चीनी आखबार ने आरोप लगाया है कि भारती ने इस बारे में जबरदस्ती का मुद्दा बनाया है जबकि चीन ने नदी पर जो बांध बनाया है उससे नदी के सालाना बहने वाले पानी का 0.02 फीसदी पानी ही बांध में रोका जा सकता है।
शनिवार चीन के विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी पीटीआई को जानकारी दी कि चीन के हाइड्रोलिक पावर प्रोजेक्ट से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा। चीन हमेशा ने ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के दोहन की खिलाफत करता रहा है।
'पाकिस्तान के साथ नहीं चीन'
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अखबार के लेख में यह भी कहा गया है कि चीन के ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी पर बांध बनाने को इससे जोड़कर न देखा जाए के चीन उड़ी हमलों के बाद पाकिस्तान की तरफ से खड़ा है। आतंकी हमलों के बाद से यह खबर जरूर है कि भारत सिंधु जल संधि की समीक्षा कर रहा है।
चीन ने यह भी सफाई दी है कि वह ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी पर जून 2014 से बांध बना रहा है। यह तारीख इस बात का सबूत है कि चीन भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाले जलयुद्ध में किसी भी तरफ नहीं खड़ा है। वह कई नदियों के साथ सीमा साझा करता है, अगर चीन नदियों के दोहन की बात करेगा तो उसे उन सभी देशों को जवाब देना पडे़गा जो उन नदियों के पानी पर निर्भर करते हैं।