भारत ने इस साल सुंजवान सैन्य शिविर पर हमला करने वाले जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मुफ्ती वकास का ब्योरा लेने के लिए पाकिस्तान से राष्ट्रमंडल करार का आह्वान किया है।
32 साल पुराने इस समझौते के तहत सभी सदस्य देश ऐसे मुद्दों पर आपस में सूचना साझा करने और कानूनी सहायता मुहैया कराने के लिए बाध्य होंगे। अधिकारियों के मुताबिक वकास को सुरक्षा बलों ने इस साल मार्च में मार गिराया था।
माना जा रहा है कि इस कदम से भारत को संयुक्त राष्ट्र से जैश-ए-मोहम्मद और उसके मुखिया मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की अपील करने में मदद मिलेगी। इससे पहले भारत के जैश और अजहर पर प्रतिबंध लगाने की मांग के प्रयास को चीन ने रोक दिया था।
भारत जो ब्योरे मांग सकता है, उनमें वकास द्वारा सुंजवान सैन्य शिविर पर आतंकी हमले से पहले और बाद में किए गए फोन कॉल भी शामिल हैं। 10 फरवरी को हुए उस हमले में छह जवान शहीद हो गए थे। एक नागरिक की मौत के अलावा तीन आतंकियों को मार गिराया गया था।
गृह और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक करार के तहत आपराधिक मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए पाकिस्तान से इस आशय की मांग वाले दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। राष्ट्रमंडल करार को जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में वर्ष 1986 में राष्ट्रमंडल देशों के कानून मंत्रियों की बैठक में अपनाया गया था।