केंद्र सरकार द्वारा गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), दक्षिण कोरिया, ओमान और यमन से गेहूं के संबंध में विशेष अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इस बीच मंत्रालय ने गेहूं निर्यात करने के संबंध में अफसरों बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।
नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला को मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि यूएई समेत कई देशों ने हमारे राजदूत के जरिए गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध के संबंध में चिंता जताई है। दक्षिण कोरिया, ओमान और यमन की सरकारों की तरफ से भी गेहूं के लिए अनुरोध आए हैं। हालांकि हम फिर से पता कर रहे हैं कि यमन की तरफ से किया गया अनुरोध आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त सरकार की ओर से है या स्वघोषित सरकार की ओर से। इन देशों को गेहूं निर्यात की मात्रा क्या होगी, इस पर हमें अभी फैसला करना है। बांग्लादेश या नेपाल से गेहूं के लिए कोई अनुरोध नहीं आया है। बांग्लादेश भारत के कुल गेहूं निर्यात का आधा हिस्सा लेता है।
उन्होंने कहा कि निर्यात पर प्रतिबंध लगाते हुए वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने और उनकी सरकारों के अनुरोध के आधार पर मिली अनुमति के आधार पर निर्यात की अनुमति दी जाएगी। सरकार ने निर्यात प्रतिबंध के बाद मिस्र के लिए 61,500 टन की गेहूं की खेप भेजने की भी अनुमति दी है, जिसकी पहले से ही कांडला बंदरगाह पर लदाई हो रही थी। अधिसूचना के समय वहां पांच जहाजों पर तीन लाख टन गेहूं की लदाई की जा रही थी। इसलिए हमने वह स्पष्टीकरण जारी किया।
प्रमुख गेहूं निर्यातक देश
देश विश्व निर्यातक में हिस्सेदारी प्रतिशत में वर्ष 2020 में निर्यात मात्रा करोड़ टन
रुस 18.78 3.727
अमेरिका 13.16 2.613
कनाडा 13.15 2.611
फ्रांस 9.96 1.979
यूक्रेन 9.09 1.806
आस्ट्रेलिया 5.23 1.04
अर्जेंटीना 5.13 1.02
भारत 0.47 0.093
स्रोत: एफएओ, वाणिज्य मंत्रालय
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण विश्व बाजारों में गेहूं की कमी की वजह से इस साल भारत से होने वाले निर्यात की मांग में इजाफा देखा गया है। निर्यात के लिए गेहूं का प्रवाह रोकने का यह फैसला वर्ष 2022-23 सीजन के लिए 1.95 करोड़ टन के संशोधित लक्ष्य तक पहुंचने के वास्ते खरीद के संघर्ष के बाद आया है। यह लक्ष्य 4.44 करोड़ टन के मूल खरीद अनुमान से लगभग 56 फीसदी कम था। खरीद में इसलिए गिरावट आई, क्योंकि किसानों ने अच्छे दामों की चाह में अपना गेहूं निजी व्यापारियों को बेच दिया, जो राज्य द्वारा निर्धारित 2,015 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से अधिक था।