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1854 में बना था देश का पहला डाकघर, 2016 में खत्म हुई तार सेवा

Sat, 09 May 2020 03:43 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कलकत्ता में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया जीपीओ - फोटो : postalmuseum.org
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आज हम सभी 21वीं सदी में जी रहे हैं। जहां हम जब चाहे किसी से भी तकनीक के जरिए बात कर सकते हैं, अपने प्रियजनों का हाल-चाल जान सकते हैं। मगर एक समय था जब ऐसा सोचना भी असंभव था। तब लोग एक दूसरे का हाल जानने के लिए या तो उनके घर जाते थे या फिर चिट्ठी भेजा करते थे। भारतीय डाक सेवा 1.55 लाख से भी अधिक डाकघरों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी डाक प्रणाली है। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि हमारे देश में डाक सेवा की शुरुआत कब हुई।

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भारतीय डाक सेवा की स्थापना यूं तो 166 साल पहले एक अप्रैल 1854 को हुई थी लेकिन सही मायनों में इसकी स्थापना एक अक्तूबर 1854 को मानी जाती है। तब तत्कालीन भारतीय वायसराय लॉर्ड डलहौजी ने इस सेवा का केंद्रीकरण किया था। उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत आने वाले 701 डाकघरों को मिलाकर भारतीय डाक विभाग की स्थापना हुई थी।


हालांकि इससे पहले लॉर्ड क्लाइव ने अपने स्तर पर 1766 में भारत में डाक व्यवस्था शुरू की थी। इसके बाद बंगाल के गवर्नर वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1774 में कोलकाता में एक प्रधान डाकघर बनाया था। अंग्रेजों ने इस सेवा की शुरुआत अपने सामरिक और व्यापारिक हितों के लिए की थी। मगर यह देश की आजादी के बाद भारतीयों के लिए सुख-दुख की साथी बन गई।
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1854 में शुरू हुई थी रेल डाक सेवा
अंग्रेजी हुकूमत ने 1854 में ही भारत में रेल डाक सेवा की शुरुआत की थी। देश में डाक और तार (टेलीग्राम) की शुरुआत दो अलग-अलग विभाग के तौर पर हुई थी। सामानांतर रूप से ही इनका विकास हुआ। 1914 में हुए प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इन दोनों विभागों का विलय कर दिया गया।

2016 में खत्म हुई तार सेवा
इसके बाद भारत में 1877 में वीपीपी और पार्सल सेवा शुरू हुई। वहीं 1879 में पोस्टकार्ड की शुरुआत हुई। टेलिफोन और मोबाइल के आने से तार सेवा की जरूरत खत्म हो गई। डेढ़ सदी से भी ज्यादा के सफर के बाद आखिरकार इस सेवा को 2016 में बंद कर दिया गया।

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