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'INDIA': विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने फेसबुक-गूगल के सीईओ को लिखा पत्र, चुनाव के दौरान तटस्थता की मांग की

Thu, 12 Oct 2023 08:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

'इंडिया' गठबंधन ने व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब पर सत्तारूढ़ भाजपा के सांप्रदायिक घृणा अभियान में मदद करने का आरोप लगाया है। गठबंधन के घटक दलों ने विपक्षी नेताओं के विचारों को दबाने का भी आरोप लगाया है।
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Mallikarjun Kharge - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को पत्र लिखा है। पत्र को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। इसमें मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कई अहम बातें की गई हैं। इसमें कहा गया है कि मेटा, अल्फाबेट और खासकर यूट्यूब भारत में सामाजिक असंगति को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक नफरत को भड़काने का दोषी है।

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क्या है मामला?
28 राजनीतिक दलों के 'इंडिया' गठबंधन ने व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब पर सत्तारूढ़ भाजपा के सांप्रदायिक घृणा अभियान में मदद करने का आरोप लगाया है। गठबंधन के घटक दलों ने विपक्षी नेताओं के विचारों को दबाने का भी आरोप लगाया है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को कड़े शब्दों में लिखे पत्र में 28 राजनीतिक दलों के समूह ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत में सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक नफरत को भड़काने का दोषी है।

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पत्र में क्या-क्या कहा गया?
पत्र में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र के हालिया खुलासे का जिक्र किया गया, जिसमें दावा किया गया कि कैसे भाजपा के सदस्य और समर्थक व्हाट्सएप ग्रुप जैसे माध्यमों के जरिए विभाजनकारी प्रचार का इस्तेमाल करते हैं। पत्र में एक अन्य मीडिया रिपोर्ट का भी जिक्र है, जिसमें फेसबुक और गूगल के अधिकारियों पर सरकार के प्रति नरम रुख अपनाने का दावा किया गया है। इसमें उनके पक्षपात के सबूत दिए गए हैं।
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'भारत में मेटा का संचालन तटस्थ रहे'
पत्र में कहा गया कि हमारे पास जानकारी है, जो आपके मंच पर विपक्षी नेताओं की सामग्री के एल्गोरिथम मॉडरेशन और दमन को साबित करता है और सत्तारूढ़ पार्टी की सामग्री को भी बढ़ावा देता है। पत्र में कहा गया कि एक निजी विदेशी कंपनी द्वारा इस तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई भारत के लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने के समान है। चूंकि, 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में आपसे हमारी गंभीर और तत्काल अपील है कि आप इन तथ्यों पर गंभीरता से विचार करें और तुरंत सुनिश्चित करें कि भारत में मेटा का संचालन तटस्थ रहे।

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