पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ का पता लगाने वाली आठ लेजर प्रणाली ने काम करना शुरू कर दिया है। आने वाले कुछ दिनों में चार और प्रणाली पूरी तरह काम करने लगेंगी। इसके साथ ही पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों में हाईटेक निगरानी की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने पांच पायलट प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी है।
इस परियोजना के दायरे में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात और पश्चिम बंगाल की सीमा है। दरअसल इन इलाकों में नदियों के रास्ते होने वाली घुसपैठ एक बड़ी समस्या है। पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के पास ऐसी कुछ संवेदनशील जगहें हैं, जहां से आतंकी घुसपैठ होती रहती है। यहां तारबंदी भी मुश्किल है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसी का उपाय निकाला गया है और इसकी पहली कड़ी के रूप में 12 लेजर उपकरण तैयार हैं। बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि लेजर दीवार ने काम करना शुरू कर दिया है और इसके शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं।
पंजाब में घुसपैठ की पहचान के लिए 45 अतिरिक्त लेजर प्रणाली तैयार की जा रही है। इन प्रणालियों को सीमावर्ती इलाकों में स्थापित किया जाएगा। इन चारों राज्यों में घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील नदियों के लगभग 40 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में सुरक्षा के पांच नए पायलट प्रोजेक्ट जल्द शुरू किए जाएंगे। सीमा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेवानिवृत्त गृह सचिव मधुकर गुप्ता की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट दो महीने के अंदर केंद्र सरकार को मिल जाएगी।
इस रिपोर्ट के आधार पर उन इलाकों की सुरक्षा के लिए कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई की जाएगी, जहां बाड़ नहीं लगी है। इस पर एक विस्तृत नीति बनाई जाएगी, जिसमें सिविल इंजीनियरिंग और तकनीकी समाधानों को शामिल किया जाएगा।
गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि आतंकियों द्वारा पठानकोट हमले के लिए इस्तेमाल किए गए रूट के बारे में एनआईए अब भी जांच कर रही है। सुरक्षा कमियों और चूक को समाप्त करने के लिए भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
पंजाब में गुरदासपुर सेक्टर में एक अतिरिक्त बटालियन तैनात की गई है। जम्मू कश्मीर की जम्मू सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में दो मार्गों की पहचान की गई है। इस छह किलोमीटर के इलाके में सीमा पर नदियां और नाले हैं, जो आतंकियों के लिए घुसपैठ के आसान रास्ते रहे हैं। इन इलाकों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।
एलओसी पर तैनात हो रहे उन्नत चौकसी उपकरण
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सीमा और एलओसी पर हाईटेक चौकसी उपकरण तैनात किए जा रहे हैं। सूचना नेटवर्क और सुरक्षा एजेंसियों में समन्वय की प्रणाली को उन्नत बनाया गया है। सीमा के पास और अपनी सीमा के अंदर के इलाकों में तलाशी के विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। अग्रिम चौकियों के मानचित्रों की समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था की गई है।