संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दूरसंचार विभाग की सार्वजनिक कंपनियां बीएसएनएल व एमटीएनएल की वित्तीय दशा में गिरावट के लिए पूर्व की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2014 में सत्ता संभाली तो दोनों कंपनियों का नुकसान 10,000 करोड़ रुपये का था।
प्रसाद ने बुधवार को लोक सभा में कहा कि वर्ष 2004 में बीएसएनएल 10,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रही थी और एमटीएनएल 900 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी। वहीं जब वर्ष 2014 में जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार ने कामकाज संभाला तो बीएसएनएल 8,000 करोड़ रुपये तो एमटीएनएल 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान में थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004-2014 के दौरान कैसे बीएसएनएल व एमटीएनएल की वित्तीय हालत खराब हुई, इस पर सदन में चर्चा के लिए हम लोग तैयार हैं। प्रसाद ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि अब तक बीएसएनएल व एमटीएनएल के विलय को लेकर सरकार की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा कि दोनों ही कंपनियां अधिक से अधिक कमाई करने के लिए पूरा प्रयास कर रही हैं, ताकि खुद को घाटे से निकाल सकें। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियों के लगातार प्रयास से उनके फिर से अच्छी स्थिति में आने के सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं।
वित्त वर्ष 2014-15 में बीएसएनएल की अपनी सेवाओं से होने वाली आय में वित्त वर्ष 2013-14 के मुकाबले 4.16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2014-15 में बीएसएनएल की यह आय 27,242 करोड़ रुपये रही जो कि वित्त वर्ष 2013-14 में 26,153 करोड़ रुपये थी।
वित्त वर्ष 2015-16 के पहले नौ महीनों में सेवाओं से होने वाली आय में 2.16 फीसदी की बढ़ोतरी रही। वित्त वर्ष 2014-15 में बीएसएनएल को 672 करोड़ रुपये का संचालित लाभ हुआ। वित्त वर्ष 2015-16 में संचालित लाभ और अधिक रहने की उम्मीद की जा रही है।