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भारत जापान के साथ करेगा मिलिट्री लॉजिस्टिक संधि, हिंद महासागर में चीन को देगा टक्कर

Fri, 05 Jun 2020 10:13 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ट्विटर
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भारत ने लगातार चीन के भारत-प्रशांत क्षेत्र में विस्तारवादी व्यवहार पर दृढ़ता से नजर बनाई हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में अपने रणनीतिक और नौसैनिक परिचालन पहुंच का विस्तार करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ  सैन्य समझौता कर रहा है।

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अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ इस तरह के समझौते करने के बाद, गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के बीच हुई वर्चुअल सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली ने कैनबरा के साथ 'म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट' (एमएलएसए) करने की इच्छा जताई। 


सूत्रों ने बताया कि इतना ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत जापान के साथ मिलिट्री लॉजिस्टिक संधि करने के  लिए तैयार है। वहीं, रूस और यूनाइटेड किंगडम के साथ भी इसी तरह के समझौते पर बातचीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि एमएलएसए हमारे युद्धपोतों को ऑस्ट्रेलियाई नौसैनिक ठिकानों पर लंगर डालने, रखरखाव और भंडारण सुविधाओं का लाभ उठाने के साथ-साथ ऑस्ट्रेलियाई टैंकरों से ईंधन भरने में सक्षम बनाएगा। 
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भारत ने 2016 में 'लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' (एलईएमओए) के तहत अमेरिका के साथ संधि की। इसके तहत भारत को जिबूती, डिएगो गार्सिया, गुआम और सुबिक की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों से ईंधन भरने और वहां जाने की अनुमति मिली। 

फ्रांस के साथ 2018 में हुए इसी तरह के समझौते के तहत भारतीय नौसेना को दक्षिण-पश्चिम आईओआर तक पहुंचने में मदद मिली। नौसेना मेडागास्कर के निकट रियूनियन द्वीपों और जिबूती स्थित फ्रांसीसी ठिकानों तक पहुंच हासिल कर सकी।

सूत्रों ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ एमएलएसए हमें दक्षिणी आईओआर के साथ-साथ पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। इंडोनेशियाई जलडमरूमध्य का क्षेत्र भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है।

अगस्त 2017 में जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा बनाने के बाद आईएओआर में चीन के तेजी से विस्तार करने की पृष्ठभूमि में भारत के लिए ये सभी समझौते महत्वपूर्ण हैं। 

चीन अपनी पनडुब्बियों और युद्धपोतों के लिए माल उतारने और लादने की सुविधाओं के लिए पाकिस्तान में कराची और ग्वादर बंदरगाहों तक भी पहुंच रखता है। वह कंबोडिया, वनातू और अन्य देशों में सैन्य ठिकानों को स्थापित करने के लिए भी कोशिश कर रहा है ताकि वह भारत-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत कर सके। 

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