अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत अपनी स्थिति पर कायम रहेगा। हम ऐसी नीतियां अपनाएंगे जो हमारे राष्ट्रीय हित में हों। किसी से समझौते या दबाव में आने का सवाल ही नहीं उठता।
नायडू ने कहा, हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं और हमें भरोसा है कि जो हम कर रहे हैं, वह सही है। हम अमेरिका सहित सभी देशों से अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करेंगे, क्योंकि दोनों ही लोकतंत्र हैं। लेकिन भारत के लोग इस बात से खुश नहीं हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान को संरक्षण देने की कोशिश की, जो अब आतंकवादियों का अड्डा बन चुका है और जिसने 26 निर्दोष लोगों की हत्या करवाई।
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राष्ट्रीय हित में खुद फैसले लेगा भारत: पूर्व उपराष्ट्रपति
पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, ऐसे हालात में अगर कोई पाकिस्तान का समर्थन करता है, तो यह हमारी समझ में नहीं आ रहा है कि ये सब क्यों हो रहा है। मैं दोबारा स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम एक स्वतंत्र देश हैं और अपने राष्ट्रीय हितों के लिए पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे, कोई समझौता नहीं होगा। रूस से कच्चा तेल खरीदने के लोकर उन्होंने कहा, जो देश खुद रूस से तेल खरीद रहे हैं, वहीं हमारे रूस से तेल खरीदने पर आपत्ति जता रहे हैं। लेकिन हमें किस देश से तेल मंगाना है, यह फैसला हम अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए खुद करेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर के वीरों और महान वैज्ञानिकों को सलाम: नायडू
भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 प्रणाली से पांच पाकिस्तानी विमानों को मार गिराए जाने की पुष्टि होने पर नायडू ने कहा, हमें ऑपरेशन सिंदूर के हमारे वीरों, हमारे महान सैनिकों और उन महान वैज्ञानिकों को भी सलाम करना चाहिए, जिन्होंने हमें हथियार और उपकरण उपलब्ध कराए। हमें हमेशा इन सभी को याद रखना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में उनके महान योगदान के लिए हम उनके आभारी हैं।
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किसी से दुश्मनी नहीं रखता भारत: सुरेश प्रभु
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, भारत कई देशों के साथ गहरे संबंध साझा करता है। कुछ संबंध बहुत पुराने हैं। हम किसी से दुश्मनी नहीं रखते। अगर कोई हमारे देश से दुश्मनी रखता है, तो वह उनकी सोच है। हम अपने संबंधों को और मजबूत करने की लगातार कोशिश करते रहते हैं। रूस के साथ हमारे संबंध बहुत पुराने हैं, जब वह सिर्फ रूस नहीं बल्कि सोवियत संघ था। इसलिए ये संबंध आगे भी चलते रहेंगे। हमें भरोसा है कि हमारा देश और हमारे लोग आने वाले समय में किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।