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नई दिल्ली: चीनी प्रभाव के बीच भारतीय विदेश सचिव का श्रीलंका दौरा, कई अहम मुद्दों पर होगी बात

Sat, 02 Oct 2021 01:22 PM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला इस दौरे में मध्य जिले कैंडी, पूर्वी बंदरगाह शहर त्रिंकोमाली और उत्तरी शहर जाफना का दौरा भी करेंगे। शृंगला का विदेश सचिव के रूप में ये पहला श्रीलंका दौरा है।
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भारत के विदेश सचिव श्रृंगला आज से 4 दिन के श्रीलंका दौरें पर है। - फोटो : social media
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विस्तार
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विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला शनिवार को चार दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे। यहां वह राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे समेत शीर्ष नेताओं से मिलेंगे और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती पर बात करेंगे। अपने समकक्ष विदेश सचिव जयनाथ कोलंबेज के न्योते पर पहुंचे शृंगला दोनों देशों के बीच बहुआयामी रिश्तों और द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे।

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विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि विदेश सचिव इस दौरे में मध्य जिले कैंडी, पूर्वी बंदरगाह शहर त्रिंकोमाली और उत्तरी शहर जाफना का दौरा भी करेंगे। शृंगला का विदेश सचिव के रूप में ये पहला श्रीलंका दौरा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे जो कि संयुक्त राष्ट्र की बैठक में हिस्सा लेने अमेरिका गए हुए हैं, सोमवार को स्वदेश लौटेंगे। इसके बाद ही उनकी मुलाकात शृंगला से होगी। 

भारत से हो बराबरी का व्यवहार
भारत सरकार चीन निवेश के खिलाफ नही हैं। सरकार चाहती है कि श्रीलंका सरकार भारत और चीन दोनों के साथ बराबरी का व्यवहार रखें। भारत सरकार यह भी चाहती है कि श्रीलंका सरकार दोनो देशों के बीच 1987 में हुए समझौते का भी पालन करें जिसके अनुसार श्रीलंका के किसी भी बंदरगाह को अन्य देश को सैन्य इस्तेमाल के लिए नही दिया जाए।
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श्रीलंका ने अडाणी ग्रुप को हाल ही में दिया है 700 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट
श्रीलंका ने हाल ही मे भारत और जापान के द्वारा संयुक्त रूप से बनाए जा रहें कोलंबो पोर्ट के पूर्वी टर्मिनल के सौदे को रद्द कर दिया था। इसके बाद भारत की नाराज़गी को देखते हुए श्रीलंका ने एक बार फिर से इसी बंदरगाह पर एक अन्य टर्मिनल बनाने का काम भारत की कंपनी को सौंपा है। इस टेंडर की लागत मूल्य 700 मिलियन डॉलर है और इसे भारत की दिग्गज कंपनी अडाणी ग्रुप पूरा करेगी। 

इस पश्चिमी कंटेनर टर्मिनल प्रोजेक्ट के निर्माण में भारत सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। इसके बावजूद भी चीन द्वारा लीज पर लिए गए बंदरगाह के पास में भारत की एक कंपनी द्वारा इसे  बनाया जाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। भारत की कंपनी द्वारा इस पश्चिमी कंटेनर टर्मिनल को बनाए जाने की खबरों को भारत द्वारा चीन के प्रभाव को कम करने की कोशिश  बताया जा रहा हैं। वहीं एक ओर यह भी कहा जा रहा है कि भारत सरकार श्रीलंका द्वारा कोलंबो पोर्ट के पूर्वी टर्मिनल के सौदे को रद्द करने के एकतरफा फैसले से अब भी चिंतित है। 

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