भारत ने एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को खत्म करने के लिए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का फैसला लिया है। वियतनाम के अलावा इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली और ब्राजील समेत 15 और बाजारों पर भी भारत की नजर है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का ये प्रयास चीन की बढ़ती सैन्य मुखरता को लेकर उसकी चिंता को जाहिर करता है।
वियतनाम बीते पांच साल से ब्रह्मोस मिसाइल की मांग कर रहा है तो वहीं हनोई की ब्रह्मोस खरीदने का आवेदन भारत के पास 2011 से पड़ा है लेकिन चीन मिसाइल ब्रह्मोस को अस्थिरता पैदा करने वाले हथियार के तौर पर देखता है। भारत चीन की नाराजगी की आशंका के चलते वियतनाम के साथ सौदा करने से हिचकता रहा है और पिछली यूपीए सरकार ने इसी वजह से वियतनाम को यह मिसाइल नहीं दी थी। मगर अब मोदी सरकार ने इस सोच को बदल दिया है जिससे अब भारत के अमेरिका, जापान और वियतनाम के साथ मजबूत संबंधों को आगे रख कर चीन से मजबूती से निपट सकता है।
चीन के साथ हाल में कई मुद्दों पर भारत की तल्खी सामने आई है। पाकिस्तान में मौजूद आतंकी अजहर मसूद पर संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंध लगाने की भारत की कोशिशों को चीन ने विफल कर दिया था। इसके अलावा परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह यानी एनएसजी में भारत को शामिल करने की कोशिशों में भी चीन ने अड़ंगा लगाने की कोशिश की।