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पुलवामा हमले के बाद कार्रवाई के साथ-साथ 'वेट एंड वाच' की भूमिका में भारत

Wed, 20 Feb 2019 09:27 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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पुलवामा में सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) काफिले पर आत्मघाती हमले के बाद केंद्र सरकार वेट एंड वाच की भूमिका में है। प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी है। सूत्र बताते हैं कि इस खुली छूट पर सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर में आतंक की जड़ों को खोजकर उसे नेस्तनाबूत करने में जुट गए हैं। इसके साथ प्लान बी और सी तैयार हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जमीन से भारत विरोधी आतंकवाद को पनाह देने को रोकने के लिए कूटनीतिक मुहिम को भी धार दी जा रही है। 

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माना जा रहा है कि भारत इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के साथ-साथ पाकिस्तान को भी तौल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में भारत के राजदूत और पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त चर्चा के लिए दिल्ली में हैं। उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अलावा शीर्ष स्तर पर अधिकारियों से मुलाकात की है। दुनिया भर के देशों में फैले भारतीय मिशनों के जरिए भी भारत ने मुहिम में तेजी लाने की कोशिश शुरू कर दी है। 

क्या चाहता है भारत

भारत का मकसद साफ है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान पुलवामा हमले को गंभीरता से लेते हुए अपने देश में बैठे आतंक के आकाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे। सूत्र बताते हैं कि इसके बाबत इस्लामाबाद से लेकर दुनिया के देशों को कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश हो रही है। सैन्य सूत्रों का भी कहना है कि पाकिस्तान में भारत की संभावित कार्रवाई को लेकर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ रहा है। 

इस दबाव का ही असर है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने न केवल संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा है, बल्कि भारत द्वारा कार्रवाई किए जाने पर जंग छेड़ने तक की चेतावनी भी दे दी है। बताते हैं नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के  कब्जे वाले क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ी है। इसी तरह से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी भारत के दबाव का असर दिखाई दे रहा है।

आतंकवाद नहीं सहेगा भारत

सूत्र बताते हैं कि भारत की नीति में स्पष्टता है। नई दिल्ली ने साफ किया है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान के सहयोग से भारत में होने वाली आतंकी घटना को नहीं सहेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के बयान में भी इसके साफ संदेश हैं। समझा जा रहा है कि भारत पुलवामा में आत्मघाती आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद के सबूतों का डौजियर अंतरराष्ट्रीय पर जी फाइव+1 देशों के अलावा संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य फोरम पर साझा करने की तैयारी कर रहा है। ताकि पाकिस्तान के साथ खड़ी होनी सहानुभूति को खत्म करके उसके ऊपर दबाव की तीव्रता को बढ़ाया जा सके। 
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क्या होगी आतंक के खिलाफ कार्रवाई?

सैन्य सूत्रों के मुताबिक आतंक के विरुद्ध कार्रवाई पहले की तुलना में कई गुना तेजी से चल रही है। लेकिन अभी इस कार्रवाई का दायरा जम्मू-कश्मीर है। अभी भारत-पाक सीमा पर बर्फ का स्तर काफी ऊंचा है। बर्फ पिघलने का समय शुरू होने वाला है। इस तरह से मौसम की अनुकूलता में थोड़ा समय लग सकता है। सर्जिकल स्ट्राइक के समय सक्रिय रहे पूर्व सैन्य अधिकारी की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और शीर्ष रणनीतिकारों की टीम कुछ अलग तरीके से सोचती है। 

सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी शीर्ष स्तर पर ठोस कार्रवाई की दिशा में तैयारी थी। इससे लग रहा है सही समय आने पर उच्च स्तर पर कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है। यह पूछने पर क्या यह नियंत्रण रेखा के पार की कार्रवाई या फिर स्थानीय स्तर की लड़ाई हो सकती है। सूत्र का कहना है कि युद्ध की संभावना नहीं है। पाकिस्तान युद्ध को झेल नहीं सकता और भारत इसके पक्ष में नहीं है। लेकिन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कई तरह के कदम हो सकते हैं।
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