भारत ने श्रीलंका में हुई रणनीतिक चूक को ईरान में दुरुस्त कर लिया है। सामरिक दृष्टि से भारत के लिए बेहद संवेदनशील ईरान के चाबहार बंदरगाह को लीज पर लेने के रास्ते में आने वाले सभी गतिरोध दूर हो गए हैं और नई दिल्ली ने ईरान को न्यौता दिया है कि वह जब चाहे लीज पर दस्तखत कर सकता है।
लीज पर दस्तखत होने के बाद भारत की सामरिक क्षेत्र से जुड़ी बड़ी चिंता खत्म हो जाएगी। जहाजरानी मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि ईरान चाहे तो अप्रैल महीने में आयोजित मैरीटाइम इंडिया समिट 2016 में भी भारत लीज पर बंदरगाह को लेने के पत्र पर दस्तखत करने के लिए तैयार है।
श्रीवास्तव ने अमर उजाला को बताया कि बंदरगाह की लीज को लेकर आ रही सभी दिक्कतों को दूर कर लिया गया है। पिछले महीने 12-19 फरवरी के दौरान भारतीय अधिकारियों का दल ईरान गया था और जहां आपत्ति थी उन मुद्दों का समाधान कर लिया गया है। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय को भी दी जा चुकी है।
चाबहार की लीज पर दस्तखत होने के बाद भारत की सामरिक क्षेत्र से जुड़ी बड़ी चिंता खत्म हो जाएगी। इससे भारतीय जहाज पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह (इसे चीन लीज पर लेकर विकसित कर रहा है) के आगे स्टेट ऑफ हार्मुज के मुहाने पर स्थिति चाबहार तक बेरोकटोक आ जा सकेंगे।
इतना ही नहीं भारत को अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजकिस्तान समेत मध्य एशिया के तमाम देशों में जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। इसलिए भारत और ईरान के बीच बनी इस सहमति को बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।