वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'विश्व एक परिवार', भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन की यह थीम दुनिया को डरा रहे तनाव, ध्रुवीकरण और युद्ध का जवाब है। प्रगति मैदान के भारत मंडपम में मेहमानों को हाथ जोड़े नमस्ते कहती शिल्पकृति भी इसी परंपरा की एक और मिसाल है। हमने भारतीय परंपरा से निकले विचारों से दुनिया की चिंताओं को खत्म करने का संदेश दे दिया है। समूह की अध्यक्षता करते हुए हम वैश्विक राजनीति के पथ प्रदर्शक की भूमिका में हैं। आपस में उलझे ध्रुवों को एक मंच पर बातचीत करवा रहे हैं, संतुलन बनाए रखने में जुटे हैं, दुनिया को बदलावों के लिए तैयार कर रहे हैं।
कूटनीतिक परीक्षा: ऐतिहासिक समय में अध्यक्षता और मेजबानी
जी-20 की 18वीं बैठक वैश्विक राजनीति में भारतीय कूटनीति का अहम उदाहरण साबित हो सकती है। पुतिन और जिनपिंग का न आना संकेत है कि रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख देशों को बांट रहा अहम मुद्दा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बेहद चुनौतीपूर्ण समय में भारत द्वारा जी-20 की अध्यक्षता और मेजबानी ऐतिहासिक मानी जा रही है।
हम पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीदते हुए भी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ क्वाड समूह के सदस्य बने हुए हैं। चीन के साथ सीमा पर तनाव के बावजूद ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन का भी हिस्सा हैं। अपनी विदेशी नीति केवल देश के हित में रखने की सोच के साथ हमने इस संतुलन को कायम किया है। बैठक में हमारे इस संतुलन की परीक्षा हो सकती है।
वैश्विक कानूनों पर जोर
भारत ने जलवायु परिवर्तन, ऋण ढांचे में सुधार और एक महत्वपूर्ण विषय क्रिप्टोकरेंसी पर कानूनों को जी-20 के एजेंडा में शामिल किया है। संकेत दिया कि आधुनिक तकनीकों को लेकर केवल किसी एक देश या समूह द्वारा कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे विश्व में लागू होने वाला नियमों का ढांचा बनाना होगा। साथ ही जी-20 की अपनी अध्यक्षता में भारत ने सभी देशों में इसे लेकर सहमति बनाने पर जोर दिया।
बंट रहे समूह को बनाया समावेशी
भारत ने जी-20 के एजेंडा को मानव केंद्रित विकास और वैश्विक दक्षिण की चिंताओं पर आधारित व समावेशी बनाने की कोशिश की है। सम्मेलन में बांग्लादेश, कोमोरोस, मिस्र, मॉरीशस, नाइजीरिया जैसे गैर-सदस्य देशों के प्रमुखों को निमंत्रण दिया। सबसे अहम, समूह में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाने पर जोर देना है। जी-20 को समावेशी फोरम बनाने पर जोर... आज पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन से लेकर लोकतंत्र, भोजन, स्वास्थ्य, नौकरियों पर चर्चा हो रही है। जो पहले महज नीतियों और तकनीकी विषयों पर सीमित रहती थी।
आर्थिक संकट में भारत से उम्मीद
2008 के वैश्विक आर्थिक संकट ने जी-20 को मजबूत बनाया। और अब जब कोविड के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर आर्थिक संकट में उलझती-उबरती दिख रही है, भारत सहित प्रमुख बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की ओर उम्मीद से देखा जा रहा है। आईएमएफ का अनुमान है कि भविष्य में विश्व की तीन चौथाई आर्थिक वृद्धि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से होगी। इनमें भारत सबसे अहम देश है।
भारत जलवायु के लिए ज्यादा वित्तीय योगदान के प्रस्ताव के लिए सदस्य देशों से समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहा है...कोविड में भारत द्वारा दुनिया को दिए निशुल्क और सस्ते टीकों को आज भी याद किया जाता है। महामारियों के लिए भारत ने सदस्य देशों को साथ लाने में अहम भूमिका निभाई।
...और तकनीक में नेतृत्व
दुनिया के करीब आधे डिजिटल भुगतान भारत में हो रहे हैं। इस तथ्य ने कई देशों की रुचि भारत की ओर से विकसित डिजिटल ढांचे व नीतियों में जगाई है। यूपीआई को कई देशों में उपयोग किया जा रहा है, जी-20 समिट इंडिया स्टैक को प्रदर्शित करने का मौका बन चुकी है। अब भारत की प्रणालियों और तकनीकों को बाकी दुनिया द्वारा अपनाने का समय है।