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चंद्रयान-5 पर काम कर रहे इसरो और जापानी एजेंसी
बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि भारत 2035 तक एक पूरा अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा और उसका पहला मॉड्यूल 2028 में कक्षा में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार को लेकर काफी काम चल रहा है। पहले इसरो सेवा आधारित मॉडल पर काम करता था, लेकिन अब वह व्यावसायिक अवसरों को भी अपनाना चाहता है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद जापान ने भारत के साथ साझेदारी की इच्छा जताई, जिसके तहत इसरो और जापानी एजेंसी जैक्सा मिलकर चंद्रयान-5/लूपेक्स मिशन पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका का उपग्रह को लॉन्च करेगा इसरो
नारायणन ने कहा, हम मिलकर उपग्रह बना रहे हैं और लॉन्च जापान करेगा। चंद्रयान-3 का लैंडर 1,600 किलोग्राम का था, लेकिन यह नया मिशन 6,600 किलोग्राम का होगा। हम इस पर काम कर रहे हैं और अगले दो साल में बड़ी खबर मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसरो अगले तीन महीनों में अमेरिका का 6,500 किलोग्राम का संचार उपग्रह भारतीय रॉकेट से लॉन्च करेगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्चपैड बनाने के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
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इसरो ने 10 वर्षों में लॉन्च किए 518 उपग्रह
इसरो प्रमुख के मुताबिक, गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 2027 की पहली तिमाही में अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इसरो अब तक 34 ऐसे देशों के 433 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है, जिनके पास खुद की अंतरिक्ष तकनीक नहीं है। नारायणन ने बताया कि पिछले दस वर्षों में इसरो ने कुल 518 उपग्रह लॉन्च किए हैं। इसरो प्रमुख और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को प्रतिष्ठित जी.पी. बिड़ला स्मारक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।