विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पाकिस्तान से घुसपैठ और आतंकवाद बढ़ने की आशंका जताई है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बाद भारतीय नौसेना ने गुजरात के कच्छ से लेकर कोच्चि के तटों और अरब सागर तक कमांडो के भेष में घुसपैठ करने वाले संभावित आतंकियों की निगरानी तेज कर दी है। सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी उच्च स्तर की सतर्कता बरती जा रही है। सैन्य सूत्रों को इस बार घुसपैठ बढ़ने की आशंका है।
बर्फ पिघलने के बाद सीमापार से आतंकी घुसपैठ की कोशिश करते हैं और उनकी मदद करने के लिए पाकिस्तान की सेना कवर फायर, संघर्ष विराम उल्लंघन जैसे तमाम हथकंडे अपनाती है। सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बलविंदर सिंह का कहना है कि इस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, मंत्री सब युद्ध की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में वह सीमापार से घुसपैठ को तेज करा दें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वैसे भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को इसमें महारत हासिल है।
सेना मुख्यालय के एक अधिकारी का कहना है कि युद्ध इस तरह बोल कर नहीं होता। पिछले कई दशकों से ऐसी धमकियां सुनते हुए कान पक चुके हैं। सैन्य सूत्रों को पाकिस्तान से युद्ध के बजाय छद्म युद्ध तेज किए जाने की ही आशंका है। इस छद्म युद्ध में सीमापार की ताकतें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बहला फुसलाकर आतंक के रास्ते पर ले जाने, सीमा पार से घुसपैठ को बढ़ावा देने, दुष्प्रचार या जम्मू-कश्मीर के जनमानस को भड़काने की कोशिशों को ही बढ़ावा दे सकती है। बताते हैं इसे लेकर उच्च स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।
सितंबर 2019 के तीसरे-चौथे सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र आरंभ हो रहा है। पाकिस्तान ने पहले से ही संयुक्त राष्ट्र में गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसमें भाग लेने के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों प्रतिनिधि मंडल के साथ जाएंगे। समझा जा रहा है कि भारत-पकिस्तान के आतंकवाद तथा उसके रवैये पर नकेल पहनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित किया था। इस बार के सत्र में भी वह 27 सितंबर को अपना भाषण दे सकते हैं। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री इसमें विश्व के देशों से एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए साझा अभियान चलाने और आगे आने का आह्वान कर सकते हैं। वह कश्मीर और कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नापाक कोशिशों पर भी उसे आईना दिखा सकते हैं।