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Foreign Policy: 'दक्षिण चीन सागर में शांति-स्थिरता चाहता है भारत'; क्षेत्रीय भू-राजनीति पर बोला विदेश मंत्रालय

Sat, 09 Aug 2025 02:54 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण चीन सागर पर भारत का रुख 'साफ और एक जैसा' है। भारत इस समुद्री क्षेत्र को वैश्विक साझा संपत्ति मानता है और यहां शांति व स्थिरता में उसकी गहरी दिलचस्पी है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने यह बयान फिलीपींस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान एक विशेष ब्रीफिंग में दिया।
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पी कुमारन, विदेश मंत्रालय के सचिव - फोटो : ANI
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विस्तार
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विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि दक्षिण चीन सागर पर भारत का रुख 'साफ और स्पष्ट' है। भारत इस समुद्री क्षेत्र को वैश्विक साझा संपत्ति मानता है और यहां शांति, स्थिरता और मुक्त समुद्री आवागमन बनाए रखने में उसकी गहरी दिलचस्पी है। यह बयान विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनांड आर. मार्कोस जूनियर की भारत यात्रा के दौरान एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में दिया।
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भारत-फिलीपींस नौसैनिक अभ्यास का जिक्र
इस दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव से हाल ही में संपन्न भारत-फिलीपींस नौसैनिक अभ्यास के बारे में पूछा गया। यह अभ्यास फिलीपींस के समुद्री तट के पास हुआ, जिसमें कुछ हिस्से दक्षिण चीन सागर के भी शामिल थे। यह क्षेत्र एशिया का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापारिक जहाज यातायात गुजरता है। बता दें कि इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच साझा प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा में सहयोग और आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
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दक्षिण-चीन सागर विवाद और भारत का दृष्टिकोण
दक्षिण चीन सागर लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों का केंद्र रहा है। चीन लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान इसके अलग-अलग हिस्सों पर अधिकार जताते हैं। भारत का मानना है कि इस क्षेत्र में सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस), का पालन करें। विवादों को संवाद और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाए, न कि बल प्रयोग या धमकी से।

भारत की दिलचस्पी क्यों?
पी. कुमारन ने कहा कि भारत का यहां 'स्थायी और गहरा हित" है क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा इससे जुड़ी है। मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्ग भारत की आर्थिक और रणनीतिक जरूरत है। भारत ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो समुद्री मार्गों की सुरक्षा, स्थिरता, कानून का पालन और सहयोग को बढ़ावा दें।
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क्या है दक्षिण चीन सागर विवाद?
दक्षिण चीन सागर हाइड्रोकार्बन का एक बड़ा स्त्रोत है। चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। वहीं दूसरी ओर वियतनाम, फिलीपींस और ब्रुनेई समेत कई अन्य देश भी दक्षिण चीन सागर पर अपना अधिकार होने का दावा करते हैं। जबकि भारत समेत कई अन्य लोकतांत्रिक देश विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर यूएनसीएलओएस (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) का पालन करने की अपील करते रहे हैं।
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