भारत की अध्यक्षता में जी-20 फाइनेंस ट्रैक के तहत संयुक्त वित्त और स्वास्थ्य कार्य बल की पहली बैठक मंगलवार को ऑनलाइन आयोजित की गई। बैठक में बाली जी-20 शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र पर चर्चा की गई। इटली और इंडोनेशिया ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता की। जी-20 और आमंत्रित देशों के अलावा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वित्त और स्वास्थ्य प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।
वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि कार्य बल सचिवालय ने 2023 और उसके बाद की कार्य योजना का मसौदा तैयार करने के लिए भारत की अध्यक्षता तथा सह-अध्यक्षों इटली और इंडोनेशिया के साथ काम किया। मसौदे को 2023 के लिए वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। संयुक्त वित्त और स्वास्थ्य कार्य बल के सदस्यों ने महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में योगदान की प्रतिबद्धता जताई है।
बता दें, संयुक्त वित्त और स्वास्थ्य कार्य बल का गठन 2021 में रोम में जी-20 लीडर्स शिखर सम्मेलन में किया गया था। इसका उद्देश्य महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया से संबंधित मुद्दों पर संवाद और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके जरिए वित्त और स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच अनुभवों व कार्यों को साझा करना है।
नीदरलैंड ने भारत की जी-20 अध्यक्षता में विश्वास जताया
वहीं, नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के महासचिव पॉल ह्यूजट्स ने भारत की जी-20 अध्यक्षता में विश्वास जताया और कहा कि भारत की अध्यक्षता महान होगी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूरोपीय देश अपने कार्यकाल के दौरान नई दिल्ली की मदद करने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हम भारत को जी-20 अध्यक्षता की सीट मिलने पर बधाई देते हैं। भारत ने हमें जी-20 में अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है, जैसे हम पिछले कुछ वर्षों में करते थे। हम इसके बारे में बहुत उत्साहित हैं और हमने अपने भागीदारों के साथ चर्चा की कि हम किस तरह से कई अलग-अलग विषयों पर जी-20 चर्चा को सार्थक बनाने में सहायक हो सकते हैं।
भारत-नीदरलैंड के बीच संबंधों की सराहना करते हुए पॉल ने कहा कि दोनों देश अभी भी उन क्षेत्रों की पहचान कर रहे हैं, जहां एक साथ अधिक काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड, भारत गणराज्य को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था।
1602 से पहले हुई थी भारत-नीदरलैंड के बीच संबंधों की शुरुआत
उन्होंने कहा कि भारत-नीदरलैंड के बीच संबंधों की शुरुआत 1602 से भी पहले हुई थी। तब से हमने द्विपक्षीय संबंधों में निवेश किया है और अभी भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अपार संभावनाएं हैं और समान विचारधारा वाले देश होने के नाते हम अभी भी उस दिशा में आगे काम करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जल, कृषि, स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत रूप से दोनों देशों के बीच गहरा संबंध रहा है। इन दिनों जब सभी देश सतत विकास की तलाश में हैं और नई चुनौतियां सामने आती हैं तो हम सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। हम एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति के कारण भारत निश्चित रूप से हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।