भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों को कानूनी और न्यायिक क्षमताएं बढ़ाने में सहयोग की पेशकश की है। भारत ने ये पेशकश एससीओ के सदस्य देशों के विधि एवं न्याय मंत्रियों की 10वीं बैठक में की। मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई इस बैठक को लेकर विधि मंत्रालय ने बयान भी जारी किया है। बता दें कि 2024 में कजाकिस्तान गणराज्य में एससीओ के कानून और न्याय मंत्रियों की अगली बैठक आयोजित की जाएगी।
विधि मंत्रालय ने बयान में कहा कि बैठक चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का संदेश पढ़ने के साथ शुरू हुई। शी ने अपने संदेश में सदस्य देशों से अपील की है कि सहयोग और समझ की भावना के साथ काम किया जाए ताकि एससीओ के उद्देश्यों को समझा जा सके और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए योगदान को बढ़ाया जा सके।
इस दौरान, विधि मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने एससीओ के चार्टर को लेकर भारत की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही आपसी विश्वास, संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान और आपसी लाभ के सिद्धांतों पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस दृष्टिकोण पर आधारित है कि भारत विश्व मित्र बनकर उभरा है और भारत की सबसे बड़ी ताकत विश्वास है, प्रत्येक व्यक्ति में हमारा विश्वास, सरकार में प्रत्येक व्यक्ति का विश्वास, देश के उज्ज्वल भविष्य में सभी का विश्वास और भारत में दुनिया का विश्वास। यह विश्वास हमारी नीतियों और तरीकों को लेकर है।
उन्होंने कहा कि देश में विधि संस्थाओं और प्रक्रिया को किसी भी समाज की बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना होगा। इसके मद्देनजर सरकार ने अपनी कानूनी और न्यायिक प्रणाली में कुछ दूरगामी बदलाव करते हुए कदम उठाये हैं।
विधि मंत्रालय के बयान के मुताबिक, मंगलवार की बैठक में एससीओ सदस्य देशों के सभी विधि मंत्री ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए गए। इस संयुक्त बयान में सदस्य देशों के बीच पिछले 22 वर्षों में प्राप्त कानून और न्याय के क्षेत्र में सहयोग के बारे में बताया गया है। साथ ही इसमें कानूनी और न्यायिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एससीओ सदस्य देशों के कानून और न्याय मंत्रालयों के बीच सहयोग का आह्वान किया गया। साथ ही बेहतर आदान-प्रदान के लिए सम्मेलनों और कानूनी सहयोग मंचों के आयोजन का भी आह्वान किया।
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि फोरेंसिक विशेषज्ञता और कानूनी सेवाओं पर विशेषज्ञ कार्य समूहों का काम जारी रहना चाहिए। इसमें यह भी बताया गया है कि 2024 में कजाकिस्तान गणराज्य में एससीओ के कानून और न्याय मंत्रियों की अगली बैठक आयोजित की जाएगी।