अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी सीमा पर उपजे ताजा विवाद के बीच अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यांग्त्से मेरे विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और हर साल मैं क्षेत्र के जवानों और ग्रामीणों से मिलता हूं। यह अब 1962 नहीं है। अगर कोई अतिक्रमण करने की कोशिश करता है, तो हमारे बहादुर सैनिक मुंहतोड़ जवाब देंगे।
वहीं, तवांग मामले पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस विषय को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी भी खबरें हैं कि लेह क्षेत्र में चीन गांव बसा रहा है, सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। भारतीय सेना है तो हमें पूरा भरोसा है कि हमारी सीमा सुरक्षित रहेगी।
नौ दिसंबर को हुई थी भारत-चीन सैनिकों के बीच झड़प
- इससे पहले एलएसी पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों का जमावड़ा 9 दिसंबर को देखा गया था। भारतीय सेना के जवानों ने चीनी सेना को वहां से हटने के लिए कहा और दृढ़ता से उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद हुई झड़प में दोनों पक्षों के सैनिकों को चोटें आईं। झड़प के तत्काल बाद दोनों पक्ष अपने इलाकों में लौट गए।
- बताया जा रहा है कि चीनी सैनिकों की तरफ से अचानक हुए इस हमले का मुहंतोड़ जवाब दिया गया। जहां भारत की तरफ से 20 सैनिक जख्मी हुए, वहीं चीन के घायल सैनिकों का आंकड़ा लगभग दोगुने से भी ज्यादा बताया जा रहा है।
- घटना के बाद भारत के स्थानीय कमांडर ने चीनी पक्ष के कमांडर के साथ फ्लैग मीटिंग की और पहले से तय व्यवस्था के तहत शांति और स्थिरता कायम करने पर चर्चा की। सेना के सूत्रों ने बताया कि तवांग में एलएसी के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां दोनों ही पक्ष अपना दावा करते हैं और यहां दोनों देशों के सैनिक गश्त करते हैं। यह ट्रेंड 2006 से चल रहा है।
संसद में राजनाथ सिंह ने दिया बयान
भारत और चीनी सेना के बीच हुई झड़प के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज लोकसभा और राज्यसभा में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नौ दिसंबर 2022 को PLA गुट (चीनी सेना) ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में, LAC पर अतिक्रमण कर यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास किया। चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया। कुछ ही देर में हमारे सैनिकों ने चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। इस दौरान हमारे किसी भी सैनिक की न तो मृत्यु हुई है, न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है। अधिकारियों के दखल के बाद पीएलए सैनिक वापस लौट गए। 11 दिसंबर को भारत के स्थानीय सैन्य अधिकारी ने पीएलए के अधिकारी के साथ बैठक की और इस घटना पर चर्चा की। उन्हें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी सेनाएं भारत की अखंडता के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके खिलाफ कोई भी प्रयास को रोकने के लिए तत्पर हैं। मुझे विश्वास है कि यह सदन भारत की सेना को समर्थन देगा और उसकी क्षमता और पराक्रम का अभिनंदन करेगा।