भारतीय सेना सुरक्षा के लिहाज से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर युद्ध के द्रष्टिकोण से महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात अपने जवानों को विशेष ट्रेनिंग दे रही है।
भारतीय सेना ने ये कदम पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ पिछले दो सालों से चल रहे सैन्य गतिरोध को देखते हुए उठाया है।
पूर्वी लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच भारत अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सतर्क है। यहां भारतीय सेना ने सुरक्षा संबंधी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए आपात योजना तैयार कर ली है। इस बीच खबर है कि भारतीय सेना सुरक्षा के लिहाज से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर युद्ध के द्रष्टिकोण से महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात अपने जवानों को विशेष ट्रेनिंग दे रही है। इसके साथ ही अरुणाचल सेक्टर में सीमा से लगे पहाड़ी क्षेत्रों में M-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर्स तोपों को भी तैनात किया गया है।
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भारतीय सेना ने ये कदम पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ पिछले दो सालों से चल रहे सैन्य गतिरोध को देखते हुए उठाया है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि लगातार ट्रेनिंग होते रहने से सैनिक किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सेना एलएसी के पास पूर्वोत्तर के आरएएलपी क्षेत्र में सड़कों, पुलों के निर्माण से लेकर गोला बारूद बनाने और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे को और तेजी से विकसित कर रही है। टू माउंटेन डिवीजन के जनरल-ऑफिसर-कमांडिंग मेजर जनरल एमएस बैंस ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सेना पूरी तरह से उत्तरी सीमा को लेकर सतर्क है। उन्होंने ये भी बताया कि इस इलाके में उग्रवाद के खिलाफ असम राइफल्स अभियान चला रही है, जिसके चलते सेना अपनी तैयारियों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारी युद्धक तैयारियां बेहतरीन हैं।
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वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चीन की क्षेत्र में अपने बुनियादी ढांचे को तेजी से बढ़ा रहा है। उसने एलएससी के पास अपने इलाके में बड़ी संख्या में मोबाइल टावर लगाए हैं। सैन्य अधिकारी ने बताया कि चीन को देखते हुए हम भी अपने बुनियादी ढांचे को और विकसित कर रहे हैं। किबिथू, वालोंग और हयुलियांग जैसे सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में 4जी दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है।वायु सेना की तैयारियों को बताते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना ने भी इलाके में कई नए हेलीपैड के निर्माण और उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) की क्षमताओं का विस्तार किया है।