लद्दाख की गलवां घाटी में चीन और भारत के बीच लगभग दो महीने तक चलने वाले सीमा विवाद के बाद आखिरकार चीन की सेना पीछे हटने पर मजबूर हो गई है। भारत के दबाव के बाद चीनी सैनिकों ने अपने स्थान से पीछे हटना शुरू कर दिया है। भारतीय सेना भी अपने स्थान से पीछे हटी है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि 48 घंटों तक चली गहन कूटनीतिक चर्चा, सैन्य जुड़ाव और संपर्क के चलते चीनी सैनिक पीछे हटने को तैयार हुए हैं। एनएनआई ने बताया कि इन बैठकों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लेह यात्रा हुई, जिससे चीन को एक निर्णायक और दृढ़ संदेश गया।
भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया है कि सीमा विवाद को लेकर कोर कमांडर स्तर की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप चीनी सेना ने विवाद वाले क्षेत्र से टेंट, वाहनों और सैनिकों को 1-2 किलोमीटर पीछे कर लिया है। चीनी सैनिक पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से पीछे हटे हैं। बता दें कि यहीं पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। तभी से सीमा पर तनाव जारी है। हम आपके बता रहें कि पिछले दो महीनों में कब क्या हुआ।
अप्रैल के अंत से शुरू हुआ था सीमा विवाद
सीमा विवाद के दौरान अचानक लद्दाख पहंच गए थे पीएम मोदी
- फोटो : पीटीआई
- अप्रैल के अंत से लद्दाख के पेंगांग झील के किनारे भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ।
- 5-6 मई को लद्दाख में पेंगांग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। दोनों ही ओर से कई सैनिक घायल हुए।
- 9 मई को उत्तरी सिक्किम में सीमा के पास चीनी सैनिकों की भारतीय सैनिकों के साथ झड़प हो गई। यहां भी झड़प में दोनों ओर से सैनिक घायल हुए। हालांकि सैन्य स्तर पर मामले को सुलझा लिया गया।
- 12 मई को चीन के हेलिकॉप्टर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास उड़ान भरते रहे, लेकिन भारत के सुखोई लड़ाकू विमानों ने उन्हें खदेड़ दिया। इसी दौरान चीन के सैनिक गलवां घाटी के पास भी इकट्ठा हो गए। उन्हें जवाब देने के लिए भारतीय सेना के जवान भी डट गए।
- 23 मई को सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने लेह का दौरा किया। 25 मई को लद्दाख के पेंगांग झील और गलवां घाटी में चीन से तनाव और बढ़ गया।
- 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के हालात पर अहम बैठक की। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
- 26 मई को ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को युद्ध की तैयारी का आदेश दिया।
बेनतीजा रहीं बैठकें
दोनों देशों की बीच कई बैठकें हुईं लेकिन सभी बेनतीजा रहीं
- 2 जून को दोनों सेनाओं की ओर से जनरल रैंक के अधिकारियों ने विवाद सुलझाने के लिए बैठक की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
- 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीन के मेजर जनरल लियू लिन के बीच बैठक हुई।
- 8 जून को भारत और चीन के बीच सैन्य वार्ता के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक की।
- 12 जून को गलवां क्षेत्र में उपजे विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों की ओर से मेजर जनरल स्तर की बातचीत हुई।
- 13 जून को सेना प्रमुख नरवणे ने कहा कि चीन सीमा पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हमारी बातचीत जारी है।
चीन का धोखा
15 जून सीमा पर हुई थी हिंसक झड़प
- 15 जून को गलवां घाटी में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की। उन्हें रोकने के प्रयास में हिंसक झड़प हुई, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए।
- सेना प्रमुख नरवणे ने 23-24 जून को लेह-लद्दाख का दौरा किया। 30 जून को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की तीसरी मीटिंग हुई।
- 2 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लद्दाख दौरा अचानक रद्द हो गया। इससे पहले खबर आई कि शुक्रवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सीडीएस बिपिन रावत के साथ लेह जाएंगे और 14 कॉर्प्स के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
- 3 जुलाई की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए अचानक से लेह पहुंच गए। उनके साथ सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी थे।