बीते दो महीने से एलएसी पर पड़ोसी मुल्क चीन लगातार नाक में दम किए हुए है। कभी पेंगांग झील पर तो कभी सिक्किम में, चीनी सैनिक जबरन घुसपैठ करने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। बातचीत से तनाव कम करने का ढोंग रचाने वाले चीन ने अचानक 15 जून को गलवां घाटी में यही हरकत करने की कोशिश की।
अपनी सीमा की रक्षा करने के लिए तैनात भारतीय जवानों ने जब उन्हें रोका, तो वो हिंसा पर उतर आए। हिंसक झड़प में हमारे 20 जवान शहीद हुए। माना जा रहा है कि उनके भी 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं, लेकिन चीन इसे लेकर चुप्पी साधे हुए है। इसके बाद से सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है ताकि तनाव को कम किया जा सके।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अचानक लद्दाख पहुंच गए। अप्रैल से शुरू हुए इस विवाद से लेकर पीएम दौरे की पूरी टाइमलाइन...
- अप्रैल के अंत से लद्दाख के पेंगांग झील के किनारे भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ।
- 5-6 मई को लद्दाख में पेंगांग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। दोनों ही ओर से कई सैनिक घायल हुए।
- 9 मई को उत्तरी सिक्किम में सीमा के पास चीनी सैनिकों की भारतीय सैनिकों के साथ झड़प हो गई। यहां भी झड़प में दोनों ओर से सैनिक घायल हुए। हालांकि सैन्य स्तर पर मामले को सुलझा लिया गया।
- 12 मई को चीन के हेलिकॉप्टर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास उड़ान भरते रहे, लेकिन भारत के सुखोई लड़ाकू विमानों ने उन्हें खदेड़ दिया। इसी दौरान चीन के सैनिक गलवां घाटी के पास भी इकट्ठा हो गए। उन्हें जवाब देने के लिए भारतीय सेना के जवान भी डट गए।
- 23 मई को सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने लेह का दौरा किया। 25 मई को लद्दाख के पेंगांग झील और गलवां घाटी में चीन से तनाव और बढ़ गया।
- 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के हालात पर अहम बैठक की। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
- 26 मई को ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को युद्ध की तैयारी का आदेश दिया।