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डीओबी और डेपसांग में चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी में सेना, टी-90 युद्धक टैंक तैनात

Mon, 03 Aug 2020 07:21 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टी-90 टैंक - फोटो : PTI
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चीन ने दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) और डेपसांग प्लेन्स में 17 हजार जवान तैनात कर दिए हैं। भारत भी भरपूर जवाब देने की तैयारी में है। भारत ने बड़ी संख्या में इन इलाकों में जवानों की तैनाती कर दी है। इसके अलावा यहां टी-90 टैंक की रेजीमेंट भी मौजूद है जो चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब देने को लिए तैयार है। इसके अलावा भारत ने बख्तरबंद वाहन (एपीसी) और सेना की एक ब्रिगेड (4000 जवान वाली) को दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में तैनात कर दिया है, ताकि शक्सगम-काराकोरम पास के अक्ष पर चीनी आक्रामकता को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।   

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि इन दोनों इलाकों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से मुस्तैद है। सैना की तैनाती काराकोरम दर्रे के पास पेट्रोलिंग प्वाइंट 1 से लेकर डेपसांग प्लेन्स तक की गई है। इस इलाके में चीन के 17 हजार जवान मौजूद हैं।

चीन ने अपने सैनिकों की तैनाती अप्रैल से मई के बीच में की है। इसके बाद से वे इस इलाके में पीपी-10 से पीपी-13 तक भारतीय सेनाओं को निगरानी से रोक रहे हैं।

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दौलत बेग ओल्डी और डेपसांग प्लेन्स के दूसरी तरफ के इलाके में चीन ने जब अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना शुरू किया था, तब यहां भारतीय सेना की माउंटेन ब्रिगेड और आर्म्ड ब्रिगेड ही निगरानी करती थी। लेकिन, अब इस इलाके में 15 हजार से ज्यादा जवान और कुछ टैंक रेजीमेंट भी तैनात कर दी गई
हैं। 

चीन का ये है मंसूबा
सूत्रोंं के मुताबिक, चीन का इरादा इस इलाके में सड़क बनाना है, जो उसकी टीडब्ल्यूडी बटालियन हेडक्वार्टर को काराकोरम दर्रे से जोड़ती हो। इस कोशिश को भारत पहले भी नाकाम कर चुका है। अगर चीन अपने इरादे में कामयाब हो जाता है तो अपनी सैनिक टुकड़ियों को इस इलाके में पहुंचाने में उसे कुछ घंटे ही लगेंगे। अभी जी219 हाईवे के जरिए ऐसा करने में 15 घंटे लगते हैं।

अक्साई चिन में चीन के सैनिक तैनात 

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चीनी सैनिक भारत की लद्दाख की गलवां घाटी सहित कई इलाकों से पीछे हटने को मजबूर तो हो गए हैं, लेकिन अभी भी कई इलाके हैं, जहां दोनों देशों के बीच तनातनी जारी है। चीन ने विवाद को एक नया रूप देते हुए, अक्साई चिन में सैनिक तैनात कर दिए हैं। 

दौलग बेग ओल्डी में भारत की आखिरी आउटपोस्ट 16 हजार फीट की ऊंचाई पर है, जो काराकोरम पास के दक्षिण में, चिप-चाप नदी के किनारे और गलवां श्योक संगम के उत्तर में पड़ता है। दरबुक-श्योक-डीबीओ रोड पर कई पुल 46 टन वजन वाले टी-90 टैंक्स का भार नहीं सह सकते हैं, इसलिए भारतीय सेना ने गलवां घाटी झड़प के बाद विशेष उपकरणों के जरिए इन्हें नदी-नालों के पार भेजा है।

यह भी पढ़ें: आतंकवादी संगठनों के पाकिस्तानी आकाओं के नाम अब भी काली सूची में शामिल नहीं, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोलिंग प्वाइंट्स 14, 15, 16, 17 और पैंगोंग त्सो फिंगर इलाके में चीन की आक्रामकता के बाद सेना ने बख्तरबंद वाहन (एपीसी) या इन्फेंटरी कॉम्बैट वीइकल्स (पैदल सेना का मुकाबला करने वाले वाहन), एम777 155एमएम होवित्जर और 130एमएम बंदूकों को पहले ही डीबीओ भेज दिया था। 

भारत और चीन के तय किया था कि वह दोनों सीमा पर तनाव कम करने के लिए कार्य करेंगे और इस कदम के तहत चीनी सैनिक सीमा पर कई इलाकों से पीछे हटे थे। हालांकि, इसके बाद भी भारतीय सेना सतर्कता बरत रही है और और चीनी सैनिकों की संख्या और उनके द्वारा तैनात किए जा रहे टैंक पर नजर बनाए हुई है। 

एक सैन्य कमांडर के मुताबिक, इस गर्मी के मौसम में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की आक्रामकता का मुख्य उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में 1147 किलोमीटर लंबी सीमा पर भारतीय सेना के साथ संघर्ष वाले स्थानों को खाली करना था, ताकि वह 1960 के नक्शे को लागू कराने का दावा कर सके। लेकिन इस कोशिश को 16 बिहार रेजिमेंट के जांबाजों ने 15 जून को विफल कर दिया। 
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भारतीय सेना के लिए प्लानिंग करने वालों को आशंका है कि चीन जी-219 (ल्हासा कशगार) हाईवे को शक्सगम पास के जरिए काराकोरम पास से जोड़ देगा। हालांकि, इसके लिए शक्सगम ग्लेशियर के नीचे सुरंग बनाने की जरूरत होगी, लेकिन चीन के पास इसे अंजाम देने के लिए क्षमता है। लिहाजा इन इलाकों में सेना द्वारा टी-90 मिसाइल टैंक्स तैयार किए गए हैं। 

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