भारत ने इस्लामाबाद में आयोजित हुई बहुपक्षीय एशियाई कोस्ट गार्ड की बैठक से खुद को बाहर रख कर एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो पाकिस्तान से दूरी बनाए रखने की बात पर अभी भी कायम है। ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय कोस्ट गार्ड 24-25 अक्तूबर को हुए कार्यक्रम में शामिल हो सकता था, पर ऐसा नहीं हुआ।
इस बैठक में करीब 13 देशों के कोस्ट गार्ड शामिल हुए। भारत के इस कदम से साफ हो गया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देना बंद नहीं करता वह इस तरह दूरी बनाए रखेगा। इस हफ्ते अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घानी और अमेरिका के विदेश मंत्री भी भारत आए जहां पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को पनाह दिए जाने का गंभीर मुद्दा भी उठा।
बैठक में शामिल होने के लिए आईसीजी के टॉप ऑफिसर्स का वीजा भी पाकिस्तान जाने के लिए ले लिया गया, लेकिन बाद में यह तय किया गया कि फिलहाल पाकिस्तान से किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं की जा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आईसीजी के प्रवक्ता आर के सिंह ने भी कहा कि भारत इस बैठक का हिस्सा नहीं ले रहा है।
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भारत के साथ पाकिस्तान की द्विपक्षीय वार्ता साल 2015 से ठंडे बस्ते में पड़ी है। दरअसल, पठानकोट एयरबेस पर हमला और फिर उरी सेक्टर पर हमला वार्ताओं के न होने के मजबूत कारण रहा है। इसके बाद भारतीय नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की ओर से सजा-ए-मौत दिया जाना भी दोनों देशों के बीच वार्ता न होने का कारण बनी। हालांकि, सिंधु जल समझौते जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच में बातचीत हुई है।
पाकिस्तान की ओर से कई बार नापाक कोशिशों को अंजाम दिए जाने के बावजूद भारत ने रिश्तों में आई खटास को दूर करने की कोशिश है। इसका ताजा उदाहरण विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पाकिस्तानियों को मेडिकल वीजा दिया जाना है।