पार्टी के राजनीतिक आरोपपत्र में टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष और मंत्री के.टी. रामाराव ने भगवा पार्टी पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ लोगों को बीच में छोड़ने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद विभिन्न प्रधानमंत्रियों के 67 वर्षों के दौरान देश ने 55.87 करोड़ रुपये कर्ज लिए। 2014 में सत्ता में आने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ वर्षों में अकेले 80 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया। उन्होंने दावा किया कि 2014-15 के दौरान केंद्र द्वारा ब्याज का भुगतान राजस्व का 36.1 फीसदी था। जबकि 2021 के दौरान यह 43.7 फीसदी हो गया।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि नीति आयोग द्वारा राज्य के हर गांव के लिए सुरक्षित पेयजल परियोजना मिशन भगीरथ के लिए 19 हजार करोड़ रुपये के वित्त पोषण की सिफारिश के बावजूद मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 19 पैसे भी नहीं दिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस फ्लोराइड और फ्लोरोसिस मिटिगेशन सेंटर को चौटुप्पल में स्थापित किया जाना था, उसको किसी अन्य राज्य में ले जाया गया। उन्होंने केंद्र की एनडीए सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उसने हथकरघा उत्पादों पर पांच फीसदी का जीएसटी लगाकर इस क्षेत्र के अस्तित्व को संकट में धकेल दिया है।
इस राजनीतिक आरोपपत्र में यह भी दावा किया गया है कि केंद्र, राज्यों को कृषि पंप सेट पर मीटर लगाने के लिए मजबूर कर अतिरिक्त कर्ज के नाम पर ब्लैकमेल कर रहा है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि एनडीए सरकार ने पांच साल बाद भी एसटी आरक्षण विधेय को मंजूरी न देकर तेलंगाना की अनुसूचित जनजातियों के साथ अन्याय किया।