फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharashtra: बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश-पुलिस स्टेशन के भीतर वीडियो रिकॉर्ड करना अपराध नहीं, खारिज की याचिका

Sat, 29 Oct 2022 03:59 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मार्च, 2018 में एक पुलिस स्टेशन के अंदर वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए ओएसए के तहत रवींद्र उपाध्याय के खिलाफ मामला दायर किया गया था, जिसे जस्टिस मनीष पिटाले और वाल्मिकी मेनेजेस की बेंच ने खारिज कर दिया। 
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने शनिवार को कहा कि पुलिस स्टेशन के अंदर वीडियो रिकॉर्ड करना अपराध नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) के तहत पुलिस थाना निषिद्ध (प्रतिबंधित) स्थान नहीं है।

विज्ञापन

कोर्ट ने खारिज किया मामला

सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
मार्च, 2018 में एक पुलिस स्टेशन के अंदर वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए ओएसए के तहत रवींद्र उपाध्याय के खिलाफ मामला दायर किया गया था, जिसे जस्टिस मनीष पिटाले और वाल्मिकी मेनेजेस की बेंच ने खारिज कर दिया। 

निषिद्ध स्थान की परिभाषा प्रासंगिक नहीं : कोर्ट

पुलिस स्टेशन (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
बेंच ने अपने आदेश में प्रतिबंधित स्थानों में पर जासूसी से संबंधित ओएसए की धारा-3 औ धारा-2 (8) का उल्लेख किया और कहा कि कानून में एक पुलिस स्टेशन को प्रतिबंधित स्थान के रूप में वर्णित नहीं किया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ओएसए की धारा 2(8) में परिभाषित 'निषिद्ध स्थान' की परिभाषा प्रासंगिक है। 

 

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

कोर्ट आदेश - फोटो : सोशल मीडिया
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ओएसए की धारा 2 (8) में परिभाषित 'निषिद्ध स्थान' की परिभाषा प्रासंगिक नहीं है। यह एक विस्तृत परिभाषा है, जिसमें विशेष रूप से पुलिस स्टेशनों को उन स्थानों/प्रतिष्ठानों  में शामिल नहीं किया गया है है, जिन्हें 'निषिद्ध स्थान' की परिभाषा में शामिल किया जा सकता है।

 
विज्ञापन

क्या था पूरा मामला

मोबाइल वीडियो, एमएमएस - फोटो : फाइल फोटो
शिकायत के मुताबिक, पड़ोसी से विवाद के बाद शिकायत को लेकर लेकर रवींद्र  उपाध्याय अपनी पत्नी के साथ वर्धा पुलिस स्टेशन गए ते। जहां उन्होंने पड़ोसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, वहीं उपाध्याय के खिलाफ भी क्रॉस शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने उस समय महसूस किया था कि उपाध्याय अपने मोबाइल फोन पर थाने में हो रही चर्चा का वीडियो बना रहे थे। कोर्ट ने मामले में आवेदक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपपत्र को खारिज कर दिया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें