दुनिया के 195 देशों की महिलाओं ने पहली बार एक गाने में अपनी आवाज दी है। इसके साथ ही इस गाने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। बता दें कि, इस गाने में भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक अस्मा खान ने अपनी आवाज दी है।
भारत में जन्मी और अब ब्रिटेन में रहने वाली मशहूर शेफ और रेस्टोरेंट मालिक अस्मा खान ने एक ऐतिहासिक गाने में अपनी आवाज दी है, जो 195 देशों की महिलाओं की आवाजों से मिलकर बना है। इस गाने ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है - जो सबसे ज्यादा राष्ट्रीयताओं की आवाजों से बना यह पहला संगीत रिकॉर्ड बन गया है।
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'195' के नाम से जाना जाता है गाना
यह खास गाना '195' नाम से जाना जाता है। इसका मकसद लैंगिक समानता के लिए जागरूकता फैलाना और ध्वनि चिकित्सा की ताकत से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इस गाने को अमेरिका के मशहूर और ग्रैमी-नॉमिनेटेड म्यूजिक प्रोड्यूसर मेजर और उनके साथियों मार्टिना फुक्स, किंग्सले एम, ब्रैंडन ली और आरोन डॉसन ने मिलकर बनाया है। इन सभी ने मिलकर 'द फ्रीक्वेंसी स्कूल' नाम की संस्था बनाई है, जो इस वैश्विक पहल के पीछे है।
विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक में किया गया था पेश
यह गाना पहली बार दावोस (स्विट्जरलैंड) में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की 55वीं सालाना बैठक में जनवरी 2025 में पेश किया गया था। वहीं गाने की कार्यकारी निर्माता मार्टिना फुक्स ने इस लेकर कहा, 'हमारा सपना था कि दुनिया के हर देश से एक महिला की आवाज लेकर एक ऐसा गाना बनाया जाए जो इतिहास में पहली बार हो। इस गाने के जरिए हम महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की बात कर रहे हैं और मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाना चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि गिनीज रिकॉर्ड बनना तो केवल एक शुरुआत है, उनका असली लक्ष्य दुनिया को ज़्यादा शांतिपूर्ण बनाना है।
कौन हैं अस्मा खान?
अस्मा खान भारत में जन्मी हैं और अब लंदन में रहती हैं। वह मशहूर नेटफ्लिक्स शो 'शेफ टेबल' में भी दिख चुकी हैं। अस्मा का रेस्टोरेंट दार्जलिंग एक्सप्रेस लंदन का जाना-माना भारतीय रेस्टोरेंट है, जिसे वो पूरी तरह महिलाओं की टीम के साथ चलाती हैं। उनका खाना पारंपरिक बंगाली और मुगलई स्वाद पर आधारित होता है, जो उन्होंने अपनी मां और दादी से सीखा है। अस्मा को 2024 में टाइम मैगजीन ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था।
वो संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम की शेफ एम्बेसडर भी हैं। साथ ही, उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्वीन कॉलेज और लंदन के किंग्स कॉलेज से मानद उपाधियां मिली हैं। उन्होंने ब्रिटिश संवैधानिक कानून में पीएचडी भी की है।