पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट को युद्धपोत और पनडुब्बियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देने के मामले में गिरफ्तार किए गए इंजीनियर रवींद्र वर्मा को पांच जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। शुरुआती रिमांड की समय सीमा खत्म होने पर सोमवार को रवींद्र वर्मा को ठाणे शहर की एक अदालत में पेश किया गया था, जहां उसकी रिमांड को 5 जून तक बढ़ा दिया गया। बता दें कि एटीएस आरोपी से और पूछताछ कर जानना चाहती है कि रवीन्द्र वर्मा ने देश के साथ गद्दारी क्यों की।
पायल शर्मा और इसप्रीत के नाम से आई थी फ्रेंड रिक्वेस्ट
पुलिस ने बताया कि आरोपी जेई ठाणे शहर के कलवा का रहने वाला है। फेसबुक पर उसे 2024 में पायल शर्मा और इसप्रीत नाम के अकाउंट वाले यूजर से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसके साथ चैट करते समय दोनों अकाउंट यूजर ने खुद को महिला बताकर शुरू में खुद को भारत से बताया। बाद में उन्होंने उससे कहा कि वे एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं और इसके लिए युद्धपोतों के बारे में जानकारी की जरूरत थी। फिर अगले कई दिनों की बातचीत के बाद उन्होंने उसे हनीट्रैप में फंसा लिया। फिर नौसेना की महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारी लेना शुरू कर दिया।
फोन ले जाने की नहीं थी अनुमति तो स्केच या डायाग्राम बनाकर देता था जानकारी
एक अधिकारी ने बताया कि मामले में जांच करते हुए पता चला कि वर्मा ने जानबूझकर कई बार संवेदनशील जानकारी साझा की। उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तार जेई एक रक्षा प्रौद्योगिकी फर्म में काम करता था। अपने काम के सिलसिले में उसे दक्षिण मुंबई में नौसेना डॉकयार्ड तक जाने की अनुमति थी। वह नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों पर भी जाता था। अधिकारी ने बताया कि हालांकि नौसेना डॉकयार्ड पर जाने के दौरान उसे मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में वह वहां अपना काम खत्म करने के बाद, वह स्केच या डायाग्राम बनाकर युद्धपोतों और पनडुब्बियों के बारे में संवेदनशील जानकारी देता था। उन्होंने कहा कि एटीएस को संदेह है कि उसने पाकिस्तानी एजेंट को पनडुब्बियों और युद्धपोतों के नाम भी बताए थे। रवीन्द्र वर्मा पर जासूसी से संबंधित आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61 (2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।