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इंडिया गठबंधन में उठापटक के बीच कैसे उप राष्ट्रपति के खिलाफ आएगा प्रस्ताव? राज्यसभा में विपक्ष की इतनी है ताकत

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 10 Dec 2024 06:17 PM IST

सार

Jagdeep Dhankhar: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, राज्यसभा को गठन हुए 72 वर्ष हो गए है। इतने वर्षों में पहली बार राज्यसभा के सभापति को लेकर एक प्रस्ताव सबमिट किया गया है। यह दर्शाता है कि स्थिति कितनी बिगड़ गई है। राज्यसभा में हमारे रक्षक के रूप में हमारे चेयरमैन बैठते है। हमारे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति संविधान के अच्छे जानकार है।
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विपक्षी गठबंधन इंडिया - फोटो : अमर उजाला


जानकारी के अनुसार, इंडिया गठबंधन ने संविधान के आर्टिकल 67-बी के तहत उप राष्ट्रपति को पद से हटाने की मांग को लेकर राज्यसभा में प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव उपराष्ट्रपति को हटाने की मांग को लेकर लाया गया है जो राज्यसभा के पदेन सभापति भी हैं। कांग्रेस पार्टी ओर से जयराम रमेश और प्रमोद तिवारी के साथ ही तृणमूल कांग्रेस के नदीम उल हक और सागरिका घोष ने यह प्रस्ताव राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को सौंपा है। विपक्षी पार्टियों ने जो नोटिस राज्यसभा सभापति के सचिवालय को दिया है उसमें आरोप लगाया है कि उनको बोलने नहीं दिया जाता है। राज्यसभा के सभापति हमारे साथ पक्षपात कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों ने एक दिन पहले का उदाहरण देते हुए कहा है कि ट्रेजरी बेंच के सदस्यों को बोलने का मौका दिया गया लेकिन जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बोल रहे थे, उनको रोका गया है।


इंडिया गठबंधन के इस प्रस्ताव से बीजेडी ने किया किनारा कर लिया है। बीजेडी के राज्यसभा सांसद डॉक्टर सस्मित पात्रा ने कहा है कि, यह प्रस्ताव इंडिया ब्लॉक की ओर से लाया गया है। बीजेडी इंडिया ब्लॉक का घटक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बीजेडी इस प्रस्ताव पर तटस्थ रहेगी। डॉक्टर पात्रा ने ये भी कहा है कि यह ऐसा विषय है जिससे हमारा संबंध नहीं है। हालांकि राज्यसभा में ये प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हार के बाद इंडिया गठबंधन में दरार दिखाई देने लगी हैं। ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन का नेतृत्व सौंपने की मांग ने जोर पकड़ा है। इस विवाद के कारण कांग्रेस और टीएमसी के बीच तलवारें खींचती नजर आ रही हैं। राज्यसभा में जहां कांग्रेस के 27 सांसद है। जबकि टीएमसी के 12 सांसद है।


कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, राज्यसभा को गठन हुए 72 वर्ष हो गए है। इतने वर्षों में पहली बार राज्यसभा के सभापति को लेकर एक प्रस्ताव सबमिट किया गया है। यह दर्शाता है कि स्थिति कितनी बिगड़ गई है। राज्यसभा में हमारे रक्षक के रूप में हमारे चेयरमैन बैठते है। हमारे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति संविधान के अच्छे जानकार है। लेकिन सोमवार को जो देखने को मिला है। उसने हमने मजबूर किया कि इस अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए है। इसलिए इस प्रस्ताव पर सभी पार्टियों के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए है। सभी पार्टियां कह रही है कि चेयरमैन हमारे साथ पक्षपात कर रहे है। नेता विपक्ष को पूरा मौका मिलना चाहिए। सभी को उनकी बात रखना का मौका मिलना चाहिए।


संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कोई भी मुद्दे हों, हम सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करेंगे। सपा, टीएमसी और कांग्रेस समेत कई पार्टियों के सांसद मेरे पास आए थे। पूरी कांग्रेस पार्टी राज्यसभा में चर्चा करना चाहती है, सिर्फ राहुल गांधी संसद की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेना चाहते। शायद उनका संसदीय लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। सभी सांसद चर्चा चाहते हैं, हर सांसद के लिए उनका संसदीय क्षेत्र अहमियत रखता है। राहुल के लिए कोई मुद्दा मायने नहीं रखता।


प्रस्ताव को पास करवाने में आएगी ये अड़चन

इंडिया गठबंधन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाया तो है, लेकिन उसके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। इसके अलावा उसने प्रस्ताव लाने से 14 दिन पहले नोटिस देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को खत्म हो रहा है। जबकि राज्य सभा में विपक्ष के पास कुल 103 सीटें ही हैं। ऐसे में वह प्रस्ताव पारित करने के लिए जरूरी 126 का आंकड़ा जुटा पाएगा, इस पर संदेह है। जबकि एनडीए गठबंधन के पास 120 से ज्यादा का आंकड़ा है।


उपराष्ट्रपति को हटाने के नियम

उपराष्ट्रपति को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही पेश किया जा सकता है। लोकसभा में नहीं। इसके लिए 14 दिन पहले नोटिस देना पड़ता है। इसके बाद ही प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। राज्य सभा में यह प्रस्ताव उपस्थित सदस्यों में बहुमत के आधार पर पारित होगा। राज्य सभा में इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद उसे लोकसभा में साधारण बहुमत से पारित कराना पड़ेगा। जब प्रस्ताव विचाराधीन हो तो सभापति सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता उप सभापति करेंगे। हालांकि इसको लेकर कानून में स्पष्टता नहीं है। प्रस्ताव पर मतदान के दौरान पक्ष और विरोध में बराबर मत मिलने की स्थिति में सभापति के पास मतदान का अधिकार नहीं होता है।
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प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया क्या?

उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। संसद के उच्च सदन को नियमों और परंपराओं के आधार पर सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी सभापति पर होती है। उन्हें राज्यसभा के सभापति पद से तभी हटाया जा सकता है, जब उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति के पद से हटा दिया जाए। संविधान के अनुच्छेद 67 में उपराष्ट्रपति की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने से जुड़े तमाम प्रावधान किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 67(बी) में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के एक प्रस्ताव, जो सभी सदस्यों के बहुमत से पारित किया गया हो और लोकसभा द्वारा सहमति दी गई हो, उसके जरिये उनके पद से हटाया जा सकता है, लेकिन कोई प्रस्ताव तब तक पेश नहीं किया जाएगा, जब तक कम से कम 14 दिनों का नोटिस नहीं दिया गया हो, जिसमें यह बताया गया हो ऐसा प्रस्ताव लाने का इरादा है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कांग्रेस के कई सदस्यों ने सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ पर राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान ‘पक्षपातपूर्ण रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया था।

 
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